महिला सांसदों पर अमर्यादित टिप्पणी के बाद कार्रवाई
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पूर्व सहयोगियों के साथ कहासुनी
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बहस क्या हुई, यह पता नहीं चला
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बहस के बाद कल्याण बाहर चले गये
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया। लोकसभा ने बुधवार को कल्याण बनर्जी को पूरे मानसून सत्र की शेष अवधि (जो 13 अगस्त तक चलने वाला है) के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया। यह कार्रवाई सदन के भीतर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया की महिला सांसदों के साथ तीखी बहस के दौरान अमर्यादित और अशोभनीय भाषा के कथित इस्तेमाल के बाद की गई।
दोपहर 2 बजे जब दो बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी गई शिकायत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि टीएमसी सांसद द्वारा की गई टिप्पणियों से सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचा है।
इसके बाद, पीठासीन अधिकारी के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कल्याण बनर्जी को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष के नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर चल रहे हंगामे तथा नारेबाजी के बीच यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। प्रस्ताव पारित होते ही पीठासीन अधिकारी ने बनर्जी को तत्काल सदन परिसर से बाहर जाने का निर्देश दिया, जिसके बाद विपक्ष के लगातार विरोध को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब विपक्षी हंगामे के कारण सदन स्थगित हुआ था। इस दौरान कल्याण बनर्जी और उनकी ही पार्टी की पूर्व महिला सहकर्मियों—जो अब बागी होकर एनसीपीआई में शामिल हो चुकी हैं—के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस बहस में शामिल एनसीपीआई महिला सांसदों में मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार प्रमुख थीं। कल्याण बनर्जी वर्तमान में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी में ही बने हुए हैं।
झड़प का वास्तविक कारण तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका। हालांकि, स्थिति बिगड़ती देख कई अन्य विपक्षी सांसदों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने का प्रयास किया। इसके बाद कल्याण बनर्जी सदन से बाहर चले गए। घटना के तुरंत बाद मिताली बाग और काकोली घोष दस्तीदार सहित अन्य महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।