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टीएमसी के बागी सांसदों को अपने पाले में रखने की चाल

संसद के मॉनसून सत्र के पहले नया भूचाल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है। केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए एक कदम ने तृणमूल कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल के बीच तनातनी को चरम पर पहुंचा दिया है। लोकसभा के 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों के विलय से बने नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया को केंद्र सरकार ने रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। यह फैसला इसलिए विवादों के घेरे में आ गया है क्योंकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अब तक इस आधिकारिक विलय पर अपना कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र का मजाक करार दिया है।

राजनीतिक विवाद की शुरुआत शनिवार सुबह उस वक्त हुई जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वरिष्ठ सांसद और तृणमूल के बागी गुट के मुखर चेहरे सुदीप बंदोपाध्याय को एक पत्र लिखा। इस आधिकारिक पत्र में रिजिजू ने बंदोपाध्याय को लोकसभा में एनसीपीआई के नेता के रूप में संबोधित किया और उन्हें 19 जुलाई को आयोजित फ्लोर लीडर्स की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। इस सरकारी संवाद में एक और बड़ा कदम उठाते हुए काकोली घोष दस्तीदार को इस नए दल का मुख्य सचेतक भी नामित किया गया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में गठित हुई नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया पिछले महीने तक राजनीतिक गलियारों में एक गुमनाम और छोटी सी पार्टी मानी जाती थी। लेकिन पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों द्वारा इस दल में सामूहिक रूप से विलय की घोषणा के बाद यह अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुदीप बंदोपाध्याय और 19 अन्य सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सूचित किया था कि वे एनसीपीआई में शामिल हो चुके हैं और उन्होंने संसद के भीतर एक अलग विधायी समूह के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की मांग की थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्पीकर के फैसले से पहले ही सरकार द्वारा इस समूह को सर्वदलीय बैठक में जगह देना एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। इससे यह साफ झलकता है कि मानसून सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही इस बागी गुट को संसद में एक स्वतंत्र दल के रूप में आधिकारिक मान्यता मिल सकती है। हालांकि, इन सबके बीच शनिवार शाम को लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक दलीय स्थिति दस्तावेज़ में यह स्पष्ट किया गया है कि ये 20 बागी सांसद सदन में तृणमूल कांग्रेस के अपने 8 पूर्व सहयोगियों से अलग बैठेंगे, लेकिन अभी तक विलय को अंतिम मंजूरी का उल्लेख नहीं है। इस तकनीकी पेंच के बावजूद सरकार द्वारा मान्यता का संकेत देना आने वाले दिनों में संसद में भारी हंगामे के आसार पैदा कर रहा है।