Breaking News in Hindi

हाथियों के सहारे अरुणाचल प्रदेश में रसद सप्लाई

बाढ़, भूस्खलन और कीचड़ के बीच अब एकमात्र परिवहन

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटीः प्रकृति के प्रकोप से बुरी तरह प्रभावित अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में एक अनोखी और दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। जिले के बाढ़ प्रभावित नारी-कोयू निर्वाचन क्षेत्र के सुदूर गांवों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन और ग्रामीण अब हाथियों का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में आई अचानक बाढ़ के कारण इस क्षेत्र का पूरा सड़क नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। सड़कों और पुलों के बह जाने से कोयू सर्कल के तहत आने वाले गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है, और 12 से अधिक गांव आज भी मुख्य मार्गों से कटे हुए हैं।

ऐसी विकट परिस्थितियों में, जब गाड़ियां और आधुनिक परिवहन के साधन बेअसर साबित हो गए हैं, तब प्रशासन ने ईंधन, दवाओं और राशन जैसी आवश्यक चीजों को पहुंचाने के लिए हाथियों को काम पर लगाया है। यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण है। इन विशालकाय जीवों को खड़ी पहाड़ियों, उफनती नदियों और मीलों लंबे पथरीले रास्तों को पार करना पड़ रहा है। मुश्किल हालातों के बावजूद, ये हाथी अपनी पीठ पर भारी वजन लादकर उन दुर्गम स्थानों तक पहुंच रहे हैं जहां जाना फिलहाल असंभव है। इस आपदा के समय इनका यह मौन योगदान सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों के लिए एक जीवन रेखा बन गया है।

अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने, भारी बारिश और उसके बाद आई विनाशकारी बाढ़ को करीब तीन सप्ताह बीत चुके हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से अब तक 1 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। हालांकि कई नदियों का जलस्तर अब कम हुआ है, लेकिन कम से कम तीन बार बादल फटने से मची तबाही के बाद हजारों लोग अब भी दाने-दाने को तरस रहे हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में केयी पान्योर, लोअर सियांग, लेपाराडा, ईस्ट सियांग, अपर सियांग, लोअर दिबांग, कुरुंग कुमे, पक्के केसांग, कामले, सियांग, क्रा दादी, तिरप, चांगलांग और ईस्ट कामेंग शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 29 अन्य घायल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और किरेन रिजिजू ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया था, जिसके बाद आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने जमीनी स्तर पर नुकसान का आकलन किया। अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद ताई तागाक ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए एक विशेष राहत और पुनर्वास पैकेज की मांग की है। विनाश के इस पैमाने को देखते हुए कई स्थानीय निवासी इसकी तुलना 1950 के असम भूकंप से कर रहे हैं। इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के क्षेत्रीय निदेशक एडवोकेट केनबोम बागरा ने केंद्र से अरुणाचल की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 5,000 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज मंजूर करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जमीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं और लोग भोजन, आश्रय, स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।