संसद के मॉनसून सत्र में पीएम और गृहमंत्री से सवाल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संसद के आगामी मानसून सत्र, जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है, के मद्देनजर कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर में दान में हेराफेरी के मुद्दे पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस ने इसे केवल एक बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला ही नहीं, बल्कि हिंदू आस्था पर हमला करार दिया है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि विपक्ष संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा। उन्होंने कहा, राम मंदिर चंदा चोरी देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में से एक है। आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) इसके लिए जिम्मेदार हैं, और उनका इस पर परेशान होने का नाटक करना आश्चर्यजनक है।
कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस पर संसद में बयान दें। साथ ही, पार्टी ने इस मामले की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने देश भर में चार दिनों में करीब 50 प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे जन विश्वास के साथ धोखा बताया है।
कानूनी मोर्चे पर स्थिति यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार, 13 जुलाई को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश के विशेष जांच दल को जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह सहित कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें ट्रस्ट के पूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने और सीबीआई जांच की मांग की गई है।
यह मामला अब राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर काफी गंभीर हो गया है। जहां विपक्षी दल इसे जन-भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं अदालत की सक्रियता ने इस पूरे घोटाले के वित्तीय पहलुओं की गहन जांच का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।