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सुप्रीम कोर्ट ने चार विशेष बेंचों का गठन किया

अपने यहां के पुराने लंबित मामलों के निपटारे की पहल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायालय ने विशेष रूप से सबसे पुराने लंबित दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए चार समर्पित बेंचों का गठन किया है। यह दशकों से चले आ रहे विवादों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने का एक सुनियोजित प्रयास है।

नई कार्ययोजना और विशेष बेंच नए रोस्टर नोटिफिकेशन के अनुसार, इस विशेष कार्य के लिए चार बेंचें गठित की गई हैं। इनमें से दो डिवीजन बेंचें, जिनका नेतृत्व क्रमशः न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी कर रहे हैं, पूरी तरह से सबसे पुराने दीवानी मामलों पर ध्यान केंद्रित करेंगी। प्रत्येक बेंच में दो न्यायाधीश शामिल हैं, जो इन पुराने विवादों की सुनवाई को प्राथमिकता देंगे।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन मामलों को प्राथमिकता देना है जो वर्षों से न्यायपालिका की कतार में खड़े हैं। इन बेंचों का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि दशकों पुराने कानूनी विवादों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा में हो सके। न्यायपालिका की यह संरचनात्मक कवायद उन आम नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आई है, जिनके मामले दशकों से न्याय की प्रतीक्षा में लंबित थे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल शीर्ष अदालत का लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि न्याय प्रणाली में लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। मुख्य न्यायाधीश की यह रणनीति इस दिशा में एक बड़ा संदेश है कि न्याय में देरी, न्याय से इनकार की समस्या को दूर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय अपनी कार्यप्रणाली में सुधार हेतु प्रतिबद्ध है। इन विशेष बेंचों के गठन से अब यह उम्मीद की जा रही है कि वे मामले जो दशकों से फाइलों में दबे थे, अब तेजी से सुनवाई के दायरे में आएंगे और उन्हें शीघ्रता से सुलझाया जा सकेगा।