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एक साल की कानूनी लड़ाई के बाद वापस लौटे

भारत सरकार ने जबरन बांग्लादेश में धकेल दिया था

  • बांग्लादेशी बताकर ऐसा किया गया था

  • सुप्रीम कोर्ट तक यह मामला पहुंचा

  • टीएमसी ने यह मामला उठाया था

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पिछले साल दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद कथित तौर पर अवैध प्रवासी मानकर बांग्लादेश धकेल दिए गए पश्चिम बंगाल के बीरभूम निवासी चार बंगाली प्रवासियों को एक साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बुधवार को वापस भारत लाया गया है। ये सभी लोग मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते स्वदेश लौटे। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष समीरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया के माध्यम से इनके आगमन की पुष्टि की। उन्होंने इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप और मदद के लिए भारतीय न्यायपालिका की सराहना की।

सांसद समीरुल इस्लाम ने बताया कि इन प्रवासियों को जून 2025 में बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिया गया था, जिसके बाद वे एक साल से अधिक समय तक वहीं फंसे रहे। उन्होंने कहा, अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन असली भारतीय नागरिकों को इस तरह के अन्याय और उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए। इस मामले में खुद बांग्लादेश सरकार ने भी पत्र लिखकर कहा था कि अवैध रूप से भेजे गए भारतीयों को वापस लिया जाना चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया में लंबा समय लग गया।

वापस लौटने वालों में स्वीटी बीबी, उनके दो नाबालिग बेटे और सुनाली खातून के पति शामिल हैं। इससे पहले, दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के कड़े हस्तक्षेप के बाद सुनाली खातून और उनके एक नाबालिग बेटे की भारत वापसी संभव हो पाई थी।

दरअसल, दिसंबर में जब सुनाली खातून को वापस लाया गया था, तब वह पूर्ण रूप से गर्भवती थीं। उनके पिता ने अदालत में दलील दी थी कि यदि उनकी बेटी बांग्लादेश में बच्चे को जन्म देती है, तो उस बच्चे को भारतीय नागरिकता मिलने में भारी कानूनी अड़चनें आएंगी। भारत लौटने के बाद सुनाली ने पश्चिम बंगाल के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था।

यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया था जब इन प्रवासियों ने बांग्लादेश से एक वीडियो जारी कर तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से वतन वापसी की गुहार लगाई थी, जिसके बाद टीएमसी नेता समीरुल इस्लाम ने दोनों परिवारों की इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाया।