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एक हजार सिलेंडर समुद्र में बह गये है

एचपी गैस रिफिलिंग प्लांट में बाढ़ का पानी आने का नतीजा

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः रायगढ़ के रसायनी एमआईडीसी स्थित एचपी गैस बॉटलिंग प्लांट से बुधवार को बाढ़ के पानी में बहे 2,000 से अधिक एलपीजी सिलेंडरों में से लापता करीब 1,000 सिलेंडरों को खोजने के लिए पातालगंगा नदी क्षेत्र में दूसरे दिन भी तलाशी अभियान जारी रहा। दरअसल, संयंत्र के भीतर से गुजरने वाले एक नाले में पानी का स्तर अत्यधिक बढ़ जाने (जलभराव) के कारण ये सिलेंडर बह गए थे। यह नदी समुद्र में मिलने से पहले खालापुर, पनवेल और पेन तालुकों से होकर गुजरती है।

रसायनी पुलिस और हेल्प फाउंडेशन नामक गैर-सरकारी संगठन के छह स्वयंसेवकों द्वारा अब तक नदी के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 1,000 सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। रायगढ़ के जिलाधिकारी (कलेक्टर) किशन जावले ने स्थानीय लोगों से अपील करते हुए एक पत्र जारी किया है कि यदि उन्हें कोई सिलेंडर मिले तो वे उसे वापस कर दें। कलेक्टर के इस पत्र में बहे हुए सिलेंडरों की संख्या 3,000 बताई गई है, हालांकि एचपी गैस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बहने वाले सिलेंडरों की वास्तविक संख्या 2,000 थी।

बताया जा रहाहै कि मुंबई-गोवा राजमार्ग पर स्थित खारपाड़ा पुल के नीचे से होते हुए बड़ी संख्या में सिलेंडर बहकर सीधे समुद्र की ओर चले गए। कुछ सिलेंडरों को वहां से करीब 16 किलोमीटर दूर उरण के करंजा तट के पास समुद्र में तैरते हुए भी देखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि स्थानीय निवासियों ने बड़ी संख्या में इन सिलेंडरों को अपने पास रख लिया होगा। पेन के उप-विभागीय अधिकारी प्रवीण पवार ने कहा, हमारे अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत अब तक एक भी सिलेंडर बरामद नहीं किया जा सका है।

वहीं, रसायनी पुलिस निरीक्षक अभिजीत भुजबल ने बताया, स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए अब तक 100 से अधिक सिलेंडर पुलिस को सौंप दिए हैं। कुछ सिलेंडरों को नदी के किनारे स्थित बाढ़ प्रभावित कृषि भूमियों (खेतों) में भी देखा गया था। नदी और खेतों से बरामद किए गए इन सिलेंडरों को परिवहन वाहनों की मदद से वापस गैस बॉटलिंग प्लांट लाया जा रहा है। अधिकारियों ने इस आशंका को भी खारिज नहीं किया है कि जिन लोगों को ये भरे हुए सिलेंडर मिले हैं, वे इनका अवैध रूप से उपयोग कर सकते हैं।