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विश्व प्रसिद्ध चिल्का झील में काफी समय तक फंसे रहे यात्री

पचास यात्रियों से भरा नाव बीच में खराब

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वरः ओडिशा की विश्वप्रसिद्ध और एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की चिल्का झील से एक बेहद डरा देने वाली घटना सामने आई है। झील के बीचों-बीच कम से कम 50 यात्रियों से भरी एक मोटर चालित नौका (पैसेंजर लॉन्च) अचानक यांत्रिक खराबी (मैकेनिकल फेलियर) का शिकार हो गई, जिससे उसमें सवार सभी लोगों की जान आफत में पड़ गई। यह खतरनाक वाकया उस समय घटित हुआ, जब यह यात्री नाव खोर्धा जिले के बालूगांव तट से रवाना होकर पुरी जिले के कृष्णप्रसाद गड़ा की ओर अपनी नियमित यात्रा पर आगे बढ़ रही थी।

प्राप्त आधिकारिक रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस बोट पर क्षमता के अनुसार 50 से अधिक स्थानीय यात्री, महिलाएं और बच्चे सवार थे। नाव ने बालूगांव से अपनी यात्रा सुचारू रूप से शुरू की थी, लेकिन जैसे ही वह चिल्का झील के गहरे और सुदूर मध्य क्षेत्र में पहुंची, उसके मुख्य इंजन ने अचानक काम करना बंद कर दिया। तेज लहरों और हवा के थपेड़ों के बीच अचानक इंजन ठप हो जाने से नाव पानी के तेज बहाव में अनियंत्रित होकर बहने लगी। झील के बीचों-बीच खुद को असहाय और फंसा हुआ देख नाव पर सवार यात्रियों के सब्र का बांध टूट गया। चारों तरफ पानी से घिरे होने के कारण लोगों में भारी चीख-पुकार, दहशत और अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया।

इस आपातकालीन स्थिति की भनक जैसे ही किनारे पर मौजूद स्थानीय मछुआरों और नाविकों को लगी, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। स्थानीय मछुआरों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई और अपनी तीन बड़ी पारंपरिक नावों को लेकर चिल्का झील के अशांत पानी के बीच फंसे यात्रियों की मदद के लिए तेजी से रवाना हो गए। काफी मशक्कत और कड़े सामूहिक प्रयासों के बाद, मछुआरों ने फंसी हुई लॉन्च को अपनी नावों से सुरक्षित बांधा और धीरे-धीरे खींचते हुए (टो करके) वापस किनारे पर ले आए। इस त्वरित और साहसिक मानवीय प्रयास के कारण एक बहुत बड़ा हादसा टल गया। जिला प्रशासन ने राहत की सांस लेते हुए पुष्टि की है कि इस घटना में किसी भी यात्री के हताहत होने या आंशिक रूप से घायल होने की कोई सूचना नहीं है। सभी सुरक्षित हैं।

हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर चिल्का झील में प्रतिदिन संचालित होने वाली सरकारी और निजी फेरी (नौका) सेवाओं के रखरखाव, फिटनेस और बुनियादी सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और लगातार यात्रा करने वाले यात्रियों ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि यह पहली बार नहीं है जब बीच झील में पर्यटकों या स्थानीय लोगों की नाव इस तरह खराब हुई हो। लोगों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण इन नौकाओं की नियमित तकनीकी जांच (फिटनेस ऑडिट) नहीं की जा रही है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकती है। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर नाव में लाइफ जैकेट की अनिवार्य उपलब्धता और इंजनों की समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित की जाए।