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वायनाड भूस्खलन हादसे के बाद जानकारी निकली

जिला कलेक्टर की पूर्व चेतावनी को भी अनसुना किया था

तिरुअनंतपुरमः पता चला है कि बीती 20 जून को वायनाड की जिला कलेक्टर मेघाश्री डी. आर. ने एक पत्र लिखकर निर्देश दिया था कि केरल के वायनाड जिले के मीनाक्षी क्षेत्र के पास चल रहे ट्विन टनल (जुड़वां सुरंग) प्रोजेक्ट का काम तब तक के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया जाना चाहिए, जब तक कि टनलिंग (सुरंग खुदाई) के बाद जमा हुई मिट्टी को उस इलाके से हटा नहीं दिया जाता।

केरल के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री सनी जोसेफ ने बताया कि इसी मिट्टी के धंसने के कारण मंगलवार को यह भीषण भूस्खलन हुआ। इस हादसे में कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है, सात लोग लापता हैं, जबकि कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सनी जोसेफ ने कहा, जिला कलेक्टर ने साइट पर जमा हो रही मिट्टी को हटाने के स्थायी निर्देश दिए थे। लेकिन इस आदेश पर विचार नहीं किया गया और निर्माण कंपनी टनलिंग का काम आगे बढ़ाती रही।

कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी (इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी) है, जिसके चार साल में पूरा होने की उम्मीद है। ट्यूब टनल के निर्माण का ठेका भोपाल स्थित दिलीप बिल्डकॉन को दिया गया है, जबकि परियोजना में पहुंच मार्ग (अप्रोच रोड) और पुलों का निर्माण कोलकाता स्थित रॉयल कंस्ट्रक्ट द्वारा किया जाना है। यह सुरंग कोझिकोड के अनक्कमपॉइल को वायनाड के मेप्पदी से जोड़ती है।

जोसेफ ने कहा, यह एक मानव निर्मित आपदा है क्योंकि चेतावनी को नजरअंदाज किया गया था। हम उन चूकों की गंभीरता से जांच कर रहे हैं जिन्होंने लोगों की जान जोखिम में डाली। इस सुरंग की लंबाई 8.2 किलोमीटर है, जो इसे भारत की सबसे लंबी सुरंग सड़कों में से एक बनाती है। सुरंग की अनुमानित लागत ₹2,400 करोड़ है, और इसका उद्देश्य कोझिकोड और वायनाड जिलों के बीच यात्रा के समय को कम करना है। जोसेफ ने बताया कि केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने इन कथित चूकों का संज्ञान लिया है।

इसी साल अप्रैल में इस टनलिंग प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली थी, जब शीर्ष अदालत ने पर्यावरणविदों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिसमें दावा किया गया था कि इससे पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। इस परियोजना को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पहले ही पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी थी और अदालत ने मंत्रालय की उस मंजूरी को बरकरार रखा था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि निर्माण के दौरान होने वाले किसी भी पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन को कानूनी चुनौती दी जा सकेगी।

केरल के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने मीडिया से कहा, परियोजना स्थल पर ढीली मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से डंप करने के कारण यह त्रासदी हुई है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि मानव निर्मित आपदा है। इससे पहले सरकार ने कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन को सभी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने और भारी बारिश के दौरान निर्माण कार्य रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।