विपक्षी नेता ने कहा इसका राष्ट्रीय विरोध होगा
एजेंसियां
बोगोटाः कोलंबिया के हालिया राष्ट्रपति चुनाव में हार का सामना करने वाले प्रोग्रेसिव सीनेटर इवान सेपेडा ने एक गंभीर राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला अपनी अमेरिकी नागरिकता नहीं छोड़ते हैं और अन्य शर्तें पूरी नहीं करते हैं, तो वे उन्हें कोलंबिया के नए राष्ट्राध्यक्ष के रूप में मान्यता नहीं देंगे। 21 जून, 2026 को संपन्न हुए चुनाव में एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने सेपेडा को लगभग 2,51,000 मतों (1 प्रतिशत से कम का अंतर) के मामूली अंतर से हराकर जीत हासिल की थी।
सीनेटर सेपेडा का तर्क है कि राष्ट्रपति के पास दोहरी नागरिकता होना हितों का टकराव पैदा कर सकता है। उन्होंने एस्प्रिएला से मांग की है कि वे स्पष्ट करें कि क्या वे संयुक्त राज्य अमेरिका के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं, क्योंकि एक वकील के तौर पर एस्प्रिएला ने एक ऐसे पूर्व अर्धसैनिक नेता का बचाव किया था जो अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन का मुखबिर था। इसके अतिरिक्त, सेपेडा ने मांग की है कि एस्प्रिएला निवर्तमान राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के प्रत्यर्पण के किसी भी प्रयास को रोकें, जिन पर अमेरिकी अभियोजक ड्रग तस्करों से संबंधों की जांच कर रहे हैं।
सेपेडा ने चेतावनी दी है कि यदि ये शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो वे विपक्ष के नेता के रूप में शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा का मार्ग अपनाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि सेपेडा की यह धमकी कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, क्योंकि राष्ट्रीय चुनाव परिषद पहले ही एस्प्रिएला की जीत को प्रमाणित कर चुकी है, लेकिन यह कदम भविष्य में सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों को भड़काने और कांग्रेस में एस्प्रिएला के एजेंडे को रोकने का जरिया बन सकता है।
एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला, जिन्हें द टाइगर के नाम से भी जाना जाता है, एक रूढ़िवादी वकील और व्यवसायी हैं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन प्राप्त है। वे 7 अगस्त, 2026 को राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले हैं। एस्प्रिएला ने अपने अभियान में अपराध पर सख्त रुख अपनाने और अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले की तर्ज पर मेगा-प्रिसन (विशाल जेल) बनाने का वादा किया है। इस चुनावी परिणाम को निवर्तमान राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो की नीतियों, विशेष रूप से सशस्त्र समूहों के साथ उनकी विफल शांति वार्ताओं पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है।