देश में एस आई आर के खिलाफ एकजुट हुए विपक्षी दल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, 23 विपक्षी दलों ने एकजुट होकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को पक्षपाती और दोषपूर्ण बताते हुए इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता है। इस संयुक्त प्रयास में डीएमके और आम आदमी पार्टी का हस्ताक्षर करना विपक्षी एकता के एक नए आयाम को दर्शाता है, विशेषकर तब जब ये दोनों दल 8 जून को हुई विपक्षी दलों की बैठक में शामिल नहीं हुए थे।
विपक्षी दलों का मानना है कि पश्चिम बंगाल और बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों वैध मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया, जो उनकी चुनावी हार का एक मुख्य कारण बना। इस ज्ञापन को तैयार करने का सुझाव वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने दिया था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पहल को सॉलिडैरिटी, यूनिटी एंड रेजिस्टेंस (श्योर) का नाम दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएं विफल होती हैं, तो भारतीय लोकतंत्र न्यायपालिका की ओर देखता है।
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध और चुनाव आयोग के अधिकारों के दायरे में ठहराया था, लेकिन विपक्ष का तर्क है कि इसे लागू करने की प्रक्रिया में चुनावी कानूनों का भारी उल्लंघन हुआ है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख मतदाताओं को बिना कोई कारण बताए या सुनवाई का मौका दिए मतदाता सूची से हटा दिया गया, जो चुनावी कानूनों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। साथ ही, कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा गठित 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के कामकाज पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनकी कार्यप्रणाली को अस्पष्ट बताया जा रहा है।
यह पत्र औपचारिक कानूनी याचिका के बजाय एक प्रतीकात्मक और अनौपचारिक संवाद का जरिया माना जा रहा है, ताकि उन संदेहों और अनियमितताओं को मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लाया जा सके जिन्हें शायद सीधे कानूनी याचिकाओं में दर्ज नहीं किया जा सका है। डीएमके का इस पत्र पर हस्ताक्षर करना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वे हाल ही में कांग्रेस से कुछ राजनीतिक मतभेदों के चलते इंडिया गठबंदन की बैठकों से दूर थे। इस संयुक्त हस्ताक्षर अभियान ने यह संकेत दिया है कि जब चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का सवाल उठता है, तो विपक्षी दल अपने मतभेदों को भुलाकर एक मंच पर आने के लिए तैयार हैं।