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अब सिआचिन में भी ग्रीड की बिजली पहुंचेगी

लद्दाख में ऊर्जा क्रांति की नई पहल से तीन इलाकों को फायदा

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः लद्दाख अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। दुर्गम घाटियों और सीमावर्ती इलाकों को मुख्य पावर ग्रिड से जोड़ने के लिए चल रही तीन रणनीतिक ट्रांसमिशन परियोजनाएं अपने अंतिम चरण में हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से इस साल सितंबर के अंत तक सिआचिन बेस कैंप, ज़ंस्कर और नुब्रा जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो जाएगी।

प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत क्रियान्वित की जा रही ये परियोजनाएं न केवल स्थानीय निवासियों के जीवन को आसान बनाएंगी, बल्कि डीजल जनरेटरों पर निर्भरता कम करके लद्दाख को कार्बन-न्यूट्रल क्षेत्र बनाने के विजन को भी गति देंगी। वर्तमान में लद्दाख के सात में से अधिकांश जिले ग्रिड से नहीं जुड़े थे, लेकिन इन कार्यों के बाद चांगथांग को छोड़कर लद्दाख के छह जिले नेशनल पावर ग्रिड से जुड़ जाएंगे।

हाल ही में उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। परियोजनाओं में द्रास से पदम तक 189 किलोमीटर लंबी 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन है। फ्यांग से डिस्किट तक 79 किलोमीटर लंबी 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन है। इन परियोजनाओं पर कुल 1,925 करोड़ रुपये की लागत आएगी। उपराज्यपाल ने बताया कि ज़ंस्कर घाटी में बिजली की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चार सबस्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।

नुब्रा घाटी में सिआचिन बेस कैंप और परतापुर में दो नए सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं। वहीं, चांगथांग क्षेत्र में 66 केवी नेटवर्क के तहत डर्बुक, फुब्रांग, चुशूल, मुध-न्योमा, कोरज़ोक, हानले, कोयुल और चुमाथांग जैसे आठ सबस्टेशन प्रस्तावित हैं। उपराज्यपाल ने इन परियोजनाओं के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा, नुब्रा और ज़ंस्कर को पहली बार ग्रिड से जोड़ना लद्दाख के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और वहां के स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे आपसी समन्वय बनाकर इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करें ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग जल्द से जल्द 24×7 बिजली का लाभ उठा सकें।

यह पहल न केवल स्थानीय निवासियों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी, बल्कि दुर्गम इलाकों में तैनात भारतीय सुरक्षा बलों के लिए भी ऊर्जा के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में काम करेगी।