Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
IPS Vishwas Nangre Patil: 26/11 के हीरो और नागपुर के नए पुलिस आयुक्त; जानिए कौन हैं पाटिल और क्यों च... Agra-Lucknow Expressway Accident: स्लीपर बस और ट्रेलर की टक्कर में 2 की मौत; 2 दर्जन से अधिक यात्री ... Etah Moharram Accident: एटा में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा; हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से य... Ayodhya Ram Mandir Case: दान पात्र चोरी मामले में 8 गिरफ्तार; विपक्षी पार्टियों ने ट्रस्ट पर लगाए गं... जर्मनी में जहरीली इल्लियों का कहर Indore High Court Order: धार के इमामबाड़े में मोहर्रम कार्यक्रमों पर कोर्ट का बड़ा फैसला; 1 जुलाई तक ... Chhindwara Ration News: सरकारी दुकानों से 3 महीने से गायब है शक्कर; पीले कार्डधारक चाय के लिए मोहताज MP Teacher Transfer News: तकनीकी खामियों के कारण कई शिक्षक नहीं कर पाए आवेदन; आयु सीमा बढ़ाने की उठी ... Guna POCSO Court Verdict: नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म में कराटे कोचों को आजीवन कारावास; गुरु-... Indore Health News: संजीवनी क्लिनिक में हेल्थ एटीएम बदहाल; किट और ऑपरेटर के अभाव में ठप पड़ी स्वास्थ्...

Kamakhya Temple Reopens: अंबुबाची मेले के समापन के बाद खुले कामाख्या मंदिर के कपाट; उमड़ी भक्तों की भीड़

गुवाहाटी: असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित माता कामाख्या का पावन धाम आज भक्तों के लिए दोबारा खुल गया है। 22 जून से माता के रजस्वला (अंबुबाची) काल के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे, जो 26 जून को निवृत्ति अनुष्ठान के बाद खोल दिए गए। मंदिर के बाहर मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो माता का आशीर्वाद लेने के लिए आतुर हैं।

🙏 मेले के समापन और मंदिर खुलने की प्रक्रिया

अंबुबाची मेले के समापन के बाद मंदिर में विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  • विशेष स्नान और पूजा: सबसे पहले मां कामाख्या को शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद दैनिक यज्ञ, हवन और विशेष पूजा-अर्चना शुरू होती है।

  • भोग अर्पण: देवी को ताजे फल, मिठाइयां और पारंपरिक भोग अर्पित किए जाते हैं।

  • अंगोदक और अंगवस्त्र: भक्तों को ‘अंगोदक’ और पवित्र ‘अंगवस्त्र’ (जो गर्भगृह में शिला पर बिछाया जाता है) प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

🏛️ शक्ति उपासना का केंद्र: कामाख्या मंदिर

माता कामाख्या का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक शिला (योनिकुंड) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहीं माता सती का योनि भाग गिरा था। इसी शिला से निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है, जो इस स्थान को अन्य शक्तिपीठों से अलग और विशिष्ट बनाता है।

🌟 क्यों है भक्तों में उत्साह?

मान्यता है कि अंबुबाची के बाद मंदिर के कपाट खुलने पर जो भक्त सर्वप्रथम माता के दर्शन करते हैं, उन्हें देवी की विशेष कृपा और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि मेले के समापन के समय यहां असम और पूरे भारत से लाखों की संख्या में साधु-संत, तांत्रिक और श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।