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बागी सांसद दो दलों के सदस्य नहीं हो सकते

लोकसभा अध्यक्ष के सामने तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा

  • एक घंटे तक चली यह बैठक

  • बाहर आकर मीडिया को बताया

  • गेंद अब बिड़ला के पाले में है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की दिशा में अपना पहला बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें विस्तार से बताया कि कैसे इन सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है।

लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक के बाद, अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष संविधान के अनुरूप कार्रवाई करेंगे, क्योंकि वे संसद के संरक्षक हैं, न कि तत्कालीन सरकार के रक्षक। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी ने अध्यक्ष से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इस मामले पर जल्द से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है।

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष सभी पक्षों को सुनने और मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे। इस प्रक्रिया में 10वीं अनुसूची से संबंधित विभिन्न अदालती फैसलों का अध्ययन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श भी लिया जाएगा।

यह बैठक तब हुई जब तृणमूल के वरिष्ठ सांसदों- सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा के साथ अभिषेक बनर्जी ने अध्यक्ष से मुलाकात की। इससे पहले 10 जून को अभिषेक ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की थी कि बागी सांसदों के अलग बैठने के अनुरोध पर कोई भी फैसला लेने से पहले तृणमूल का पक्ष भी सुना जाए। बागी सांसदों का तर्क है कि वे नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने की योजना बना रहे हैं।

महुआ मोइत्रा ने बैठक से कुछ घंटे पहले ही अध्यक्ष कार्यालय को लगभग 600 पन्नों के दस्तावेज और याचिकाएं सौंपीं। अभिषेक बनर्जी ने दलबदल विरोधी कानून की धारा 2(1)(ए) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद के रूप में अयोग्य हो जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 20 लोगों ने अध्यक्ष से मिलकर अलग समूह के रूप में मान्यता मांगी। बाद में हमें पता चला कि उन्होंने एनसीपीआई नामक एक पार्टी में शामिल होने का दावा किया है, जिसका नाम किसी ने नहीं सुना है। यदि कोई किसी चुनाव चिन्ह पर चुना गया है और दो साल बाद नई पार्टी में जाने का दावा कर रहा है, तो उनकी सदस्यता समाप्त होनी चाहिए।