ईरान युद्ध में भारतीयों ने भी जान गंवाईः मोदी
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जी 7 की बैठक में पीएम का संबोधन
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हमने लंबे समय से आतंकवाद झेला है
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मंच पर बगल में डोनाल्ड ट्रंप बैठे थे
एजेंसियां
नईदिल्लीः जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक टिप्पणी करते हुए वैश्विक नेताओं का ध्यान आकर्षित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में पीएम मोदी ने आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों पर चर्चा करते हुए कहा, भारतीयों ने भी अपनी जान गंवाई है। उनका यह बयान न केवल भारत के आतंकवाद-विरोधी रुख को पुख्ता करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उन बलिदानों को याद दिलाने का प्रयास है जो भारत ने दशकों से सीमा पार के आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में दिए हैं।
जी7 की बैठकों में आर्थिक सहयोग और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा आम है, लेकिन पीएम मोदी का यह संबोधन काफी अलग था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद को एक वैश्विक खतरा मानता है और किसी भी देश का इसके प्रति नरम रवैया पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। उन्होंने उन भारतीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को याद किया जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में नए भू-राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं और युद्ध की विभीषिका से कई क्षेत्र प्रभावित हैं।
ट्रंप की उपस्थिति में यह बात कहना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी दर्शाता है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक मंचों पर अपनी चिंताओं को बिना किसी संकोच के साझा करने में सक्षम है। पीएम मोदी ने जोर दिया कि मानवता के लिए खतरा बने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आतंकवाद के कारण होने वाली मानवीय क्षति को केवल संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उन परिवारों की त्रासदी है जो अपनों को खो देते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी की यह टिप्पणी आगामी द्विपक्षीय वार्ताओं और जी7 के संयुक्त घोषणापत्र को प्रभावित कर सकती है। भारत का यह कहना कि भारतीयों ने भी जान गंवाई है उन देशों के लिए एक संदेश है जो अक्सर आतंकवाद को क्षेत्रीय मुद्दा मानकर अनदेखा कर देते हैं। इस बयान के जरिए भारत ने वैश्विक आतंकवाद की परिभाषा को पुनः स्पष्ट करने और इसके विरुद्ध एक ठोस वैश्विक नीति बनाने की वकालत की है। जी7 के मंच पर इस तरह की मुखरता यह दिखाती है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श में एक केंद्रीय और निर्णायक भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।