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अब पानी और बिजली से डिजिटल डीएनए की क्रांति, देखें वीडियो

प्रयोगशाला के जटिल विज्ञान से आगे निकला जेनेटिक विज्ञान

  • जहरीले रसायनों से भी मुक्ति मिली

  • सरलता से लिख देता है डीएनए क्रम

  • हजारों साल तक डेटा सुरक्षित रहेगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दशकों से प्रयोगशालाओं में कृत्रिम डीएनए का निर्माण एक बेहद जटिल, खर्चीली और प्रदूषण फैलाने वाली रासायनिक प्रक्रिया रही है। पारंपरिक रूप से डीएनए की शृंखला तैयार करने के लिए भारी मात्रा में जहरीले ऑर्गेनिक सॉल्वैंट्स और फॉस्फेरामाइडिट रसायनों का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इसमें समय भी बहुत अधिक लगता है। लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में डेटा स्टोरेज और चिकित्सा विज्ञान की पूरी रूपरेखा बदल सकती है।

देखें इस प्रयोग का वीडियो

बायो-इंजीनियर्स ने एक विशेष प्रकार की सिलिकॉन माइक्रोचिप तैयार की है, जो केवल पानी और बिजली की मदद से काम करती है। इस तकनीक में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों की जगह प्राकृतिक एंजाइमों का उपयोग किया जाता है। प्रक्रिया के तहत, चिप पर मौजूद पानी के भीतर इन एंजाइमों को सक्रिय करने के लिए बिजली के बहुत छोटे और नियंत्रित झटके दिए जाते हैं। जैसे ही बिजली का प्रवाह होता है, एंजाइम तेजी से सक्रिय होकर डीएनए के बुनियादी घटकों (ए, टी, सी, जी) को आपस में जोड़ने लगते हैं। इस तरह यह चिप एक साथ दर्जनों जटिल डीएनए अनुक्रमों को बेहद सटीकता के साथ लिख सकती है।

इस तकनीक को डिजिटल डीएनए इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह कंप्यूटर की बाइनरी भाषा (0 और 1) को जैविक भाषा में बदलने का सबसे आसान जरिया बन चुकी है। आज के समय में दुनिया का डेटा सेंटर बहुत विशाल हो चुका है और पारंपरिक हार्ड ड्राइव्स की एक सीमा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई विधि से तैयार डीएनए चिप्स में दुनिया भर का डेटा स्टोर किया जा सकेगा, जो हजारों सालों तक सुरक्षित रहेगा।

इसके अलावा, यह तकनीक चिकित्सा के क्षेत्र में वरदान साबित होगी। इसकी मदद से जेनेटिक बीमारियों के इलाज के लिए कस्टमाइज्ड दवाएं और वैक्सीन बेहद कम समय में और सीधे क्लीनिक के भीतर ही तैयार की जा सकेंगी। पर्यावरण के अनुकूल और तेज होने के कारण, यह तकनीक आने वाले समय में बायो-कंप्यूटिंग और सिंथेटिक बायोलॉजी को पूरी तरह से डिजिटल और प्रदूषण-मुक्त बना देगी।

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