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Chhattisgarh Education News: छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही; 947 प्राइवेट स्कूलों के छात्र बिना किताबों के पढ़ने को मजबूर

छत्तीसगढ़: राज्य में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नया शिक्षा सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन प्रदेश के करीब 947 प्राइवेट स्कूलों के हजारों बच्चे किताबों के बिना स्कूल पहुँच रहे हैं। राज्य पाठ्यपुस्तक निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण छात्रों को अगले डेढ़ महीने तक बिना पुस्तकों के ही पढ़ाई करनी पड़ेगी, जिससे उनकी शिक्षा की बुनियाद कमजोर होने का खतरा बढ़ गया है।

📅 कब तक मिलेंगी किताबें?

पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा जारी नए शेड्यूल के अनुसार, किताबों का वितरण स्कूल खुलने के 10 से 15 दिन बाद शुरू होगा। विभिन्न ब्लॉकों में वितरण की तिथियां इस प्रकार हैं:

  • तिल्दा ब्लॉक: 25 जून से

  • अभनपुर ब्लॉक: 27 जून से

  • आरंग ब्लॉक: 28 जून से

  • धरसींवा ब्लॉक: 1 जुलाई से 12 जुलाई तक यानी अधिकांश स्कूलों में किताबें जुलाई के दूसरे हफ्ते तक पहुँचेंगी। शिक्षकों का कहना है कि सत्र की शुरुआत का पहला पखवाड़ा बच्चों की बुनियाद मजबूत करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो रहा है।

⚠️ पुरानी गलती से सबक नहीं

यह पहली बार नहीं है जब विभाग ने ऐसी चूक की है। जुलाई 2025 में भी निगम की अव्यवस्था के कारण शिक्षकों को डिपो में घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ा था और कई स्कूलों में तो पूरे सत्र तक हिंदी की किताबें नहीं पहुँच पाई थीं। बार-बार हो रही यह लेटलतीफी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

😡 अभिभावकों में आक्रोश

अभिभावकों का कहना है कि जब शिक्षा सत्र का कैलेंडर पहले से तय होता है, तो किताबें समय पर छपवाने में देरी क्यों होती है? बिना किताबों के सिलेबस पिछड़ेगा और बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण इलाकों के प्राइवेट स्कूल हो रहे हैं, जहाँ ब्लैकबोर्ड के अलावा बच्चों के पास वैकल्पिक संसाधनों की भारी कमी है।