शैक्षणिक सुधारों की सिफारिशों का घोषणापत्र जारी करेगी
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पुणे विश्वविद्यालय में हुआ प्रदर्शन
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राष्ट्रीय स्तर का घोषणापत्र जारी
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर आज उस समय राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियों का केंद्र बन गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। देश की मौजूदा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली और अकादमिक ढांचे में बुनियादी सुधारों की मांग को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान संगठन ने एक व्यापक राष्ट्रीय शिक्षा एवं परीक्षा सुधार घोषणापत्र भी जारी किया।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संगठन के मुख्य वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों उन अभ्यर्थियों और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए है जो वर्षों तक कठिन परिश्रम कर सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। आंदोलनकारियों ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली प्रमुख सरकारी भर्ती परीक्षाओं, तकनीकी आकलनों और अकादमिक परीक्षाओं में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।
संगठन द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन की आवश्यकता निम्नलिखित प्रशासनिक और नीतिगत विफलताओं के कारण उत्पन्न हुई है। पिछले कुछ सत्रों में देश के विभिन्न राज्यों में महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र समय से पूर्व लीक होने की घटनाओं ने पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इससे न केवल योग्य उम्मीदवारों का समय बर्बाद होता है, बल्कि वे मानसिक तनाव से भी गुजरते हैं।
परीक्षा आयोजित करने वाली नोडल एजेंसियों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों के भीतर आंतरिक जवाबदेही की भारी कमी देखी गई है। परीक्षा परिणामों में अत्यधिक देरी, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में विसंगतियां और शिकायतों के निवारण के लिए किसी प्रभावी तंत्र का न होना छात्रों में असंतोष का मुख्य कारण है। तकनीकी रूप से उन्नत होने के बावजूद, परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक उपकरणों के माध्यम से नकल कराने वाले संगठित गिरोहों (परीक्षा माफिया) पर अंकुश लगाने में प्रशासनिक ढांचा विफल साबित हुआ है।