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पूर्ण स्वदेशी सी- 295 विमान का उड़ान परीक्षण

कई वर्षों के अथक परिश्रम का सफल परिणाम सामने आया

  • वायुसेना ने इसकी औपचारिक जानकारी दी
  • पुराने एवरो विमानों का स्थान लेगा यह
  • सोलह विमान स्पेन से तैयार होकर आयेंगे

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र ने बुधवार, 10 जून 2026 को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया, जब भारत में निर्मित पहले सी-295 सैन्य परिवहन विमान ने अपनी पहली परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। भारतीय वायुसेना द्वारा आधिकारिक तौर पर साझा की गई यह जानकारी देश के रक्षा विनिर्माण इतिहास में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है। यह पहली बार है जब भारत में किसी निजी कंपनी द्वारा एक पूर्ण सैन्य परिवहन विमान का निर्माण और असेंबलिंग की जा रही है, जो अब तक केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों तक ही सीमित था।

यह परियोजना केवल एक विमान की विनिर्माण सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के सामरिक परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया एक विशाल कदम है। यह विमान भारतीय वायुसेना के पुराने हो चुके एवरो-748 विमानों के बेड़े की जगह लेगा, जो दशकों से वायुसेना को अपनी सेवाएं दे रहे थे।

भारतीय वायुसेना कुल 21,935 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से ऐसे 56 सी-295 परिवहन विमानों की खरीद कर रही है। इस मेगा रक्षा सौदे को रणनीतिक रूप से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सौदे के तहत विमानों की आपूर्ति और निर्माण को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:

समझौते के अनुसार, शुरुआती 16 विमान एअरबस द्वारा स्पेन के सेविले स्थित अपने अंतिम असेंबली लाइन से पूरी तरह तैयार स्थिति में सीधे भारतीय वायुसेना को सौंपे जा रहे हैं।

स्वदेशी असेंबली और निर्माण: शेष 40 विमानों का निर्माण और असेंबलिंग पूरी तरह से भारत के भीतर की जाएगी। इसके लिए गुजरात के वडोदरा में एक अत्याधुनिक उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है, जहां टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड  और एअरबस के संयुक्त सहयोग से इन विमानों का निर्माण किया जा रहा है।

यह घरेलू विनिर्माण ढांचा न केवल एयरोस्पेस क्षेत्र में कुशल रोजगार के हजारों अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि भारत में रक्षा क्षेत्र के लिए एक मजबूत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित कर रहा है, क्योंकि विमान के कई कल-पुर्जे देश के विभिन्न हिस्सों में भारतीय कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हैं।