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Israel-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ा युद्ध का खतरा; क्या नेतन्याहू की जंग की जिद बन रही है बड़ी मुसीबत?

इंटरनेशनल डेस्क: सीजफायर की तमाम कोशिशों के बावजूद ईरान और इजराइल ने एक बार फिर एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए हैं, जिससे मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध का खतरा गहरा गया है। अमेरिका की शांति पहल और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सलाह के बावजूद नेतन्याहू प्रशासन के आक्रामक रुख ने इस स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को 5 प्रमुख सवालों के माध्यम से समझते हैं।

🤔 सवाल-1: किसी भी सूरत में नेतन्याहू युद्ध क्यों चाहते हैं?

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह जंग केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व का सवाल बन गई है। लेबनान और गाजा मोर्चों पर कमजोर स्थिति को देखते हुए, उन्हें लगता है कि युद्ध के बहाने वे अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। वे ईरान पर लंबी दूरी की मिसाइलों के निर्माण रोकने, प्रॉक्सी गुटों (हिजबुल्लाह, हमास, हूती) को खत्म करने और परमाणु हथियार न बनाने का दबाव बना रहे हैं।

🛑 सवाल-2: अमेरिका इजराइल को रोक क्यों नहीं पा रहा है?

ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजराइल को ईरान पर हमला न करने की सलाह दी थी, लेकिन इजराइल ने इसे अनदेखा कर दिया। इजराइल का मानना है कि हिजबुल्लाह के हमलों का जवाब न देना नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए घातक होगा। यह दर्शाता है कि इजराइल फिलहाल अपनी आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक मजबूरियों को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से ऊपर रख रहा है।

📜 सवाल-3: परमाणु समझौते की बात कहां तक पहुंची है?

परमाणु समझौते का प्रस्ताव ईरान के विचाराधीन है। पाकिस्तान इस वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच एक आधिकारिक संदेशवाहक (Messenger) की भूमिका निभा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान जाकर शहबाज शरीफ का पत्र ईरानी समकक्ष को सौंपा है, जिससे बातचीत की कड़ियां जुड़ी हुई हैं।

🧩 सवाल-4: समझौते में किन मुद्दों पर पेच फंसा है?

ईरान केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं रहना चाहता। उसकी मांग है कि लेबनान, यमन और गाजा की स्थिति को भी इस समझौते का हिस्सा बनाया जाए। इसके अलावा, ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को सौंपने और अमेरिका द्वारा जब्त पैसों को रिलीज करने की शर्तों को लेकर अड़ा हुआ है, जबकि अमेरिका पहले डील साइन करने की मांग कर रहा है।

🚢 सवाल-5: युद्ध के फिर से शुरू होने पर क्या होगा?

यदि युद्ध पूर्ण पैमाने पर शुरू होता है, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ेगा:

  • व्यापारिक मार्ग: ईरान की कोशिश ‘बाब अल मंडेब’ को बंद करने की होगी, जहाँ से विश्व का 15% व्यापार होता है।

  • ऊर्जा संकट: होर्मुज की नाकाबंदी से एशिया, यूरोप और अफ्रीका में तेल और गैस का भारी संकट पैदा हो सकता है।