यह संकट सुलझा लिया गया हैः शिवकुमार
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निजी होटल में ढाई घंटे बैठक
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वर्ष 1980 से वह मेरे मित्र हैं
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थोड़ी गलतफहमी थी दूर किया
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में शनिवार की सुबह एक बड़ी राहत के साथ शुरू हुई। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद पैदा हुआ राजनीतिक संकट अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। यह विवाद राज्य के हाल ही में गठित मंत्रिमंडल में विभागों के आवंटन को लेकर उपजी असंतोष की स्थिति का परिणाम था।
इस संकट को टालने के लिए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सक्रिय भूमिका निभाई। शुक्रवार की देर रात बेंगलुरु के जयनगर स्थित एक निजी होटल में मुख्यमंत्री और रामलिंगा रेड्डी के बीच लगभग ढाई घंटे तक मैराथन चर्चा हुई। यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि रेड्डी जैसे अनुभवी नेता का इस्तीफा सरकार की स्थिरता और पार्टी के भीतर संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर रहा था। शनिवार तड़के करीब 1:30 बजे जब मुख्यमंत्री बैठक से बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर विश्वास था। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक पारिवारिक मामला था जिसे आपसी बातचीत से सुलझा लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम को महज एक गलतफहमी करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेड्डी की नाराजगी किसी बड़े मतभेद का नतीजा नहीं थी, बल्कि संचार में कमी के कारण कुछ गलतफहमियां पैदा हो गई थीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पूरी मजबूती और सुचारू रूप से कार्य करेगी। शिवकुमार ने इस दौरान अपनी और रेड्डी की दशकों पुरानी मित्रता का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि वे 1980 के दशक से मित्र हैं, जो उनके बीच के निजी तालमेल को दर्शाता है।
इस पूरे विवाद की जड़ विभाग आवंटन में छिपी थी। अनुभवी नेता रामलिंगा रेड्डी को सरकार में बृहद और मध्यम सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि रेड्डी की प्राथमिकता बेंगलुरु विकास विभाग थी, जिसकी कमान वे संभालना चाहते थे। अपनी इसी इच्छा के पूर्ण न होने पर उन्होंने पद छोड़ने का मन बनाया था। हालांकि, उन्होंने इस्तीफा देते समय भी यह स्पष्ट किया था कि वे कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं और पार्टी का साथ नहीं छोड़ेंगे।
इस घटनाक्रम ने यह भी संकेत दिया है कि नई सरकार के सामने वरिष्ठ नेताओं की आकांक्षाओं को संतुलित करने की चुनौती बनी रहेगी। बहरहाल, मुख्यमंत्री के त्वरित हस्तक्षेप ने फिलहाल के लिए संभावित राजनीतिक अस्थिरता को थाम लिया है और सरकार के एकजुट बने रहने का संदेश दिया है।