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अब हमें डरकर नहीं जीना हैः अभिजीत

दिल्ली पुलिस ने विवाद बढ़ने से पहले ही दी अनुमति

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी

  • देश भर से आयी हजारों छात्रों की भीड़

  • वांगचुक और दीपांकर भट्टाचार्य शामिल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में छात्र, युवा पेशेवर, अभिभावक और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी एकत्र हुए। प्रदर्शन का नेतृत्व सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य एजेंडा परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था। इस मंच पर प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी मौजूद रहे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने एहतियाती कदम उठाते हुए छह लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रदर्शन के दौरान दो समूहों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए की गई थी। हालांकि, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों, परीक्षा परिणामों में अनिश्चितता और अधिकारियों की जवाबदेही के अभाव ने उनकी व्यवस्था पर से भरोसा उठा दिया है। प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष, दोनों के प्रति निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। प्रदर्शन स्थल पर भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी मौजूद थे और उन्होंने युवाओं के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल देखी गई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार से युवाओं की बात सुनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे युवाओं को कमतर नहीं आंकना चाहिए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में उन्होंने कहा कि चिलचिलाती गर्मी में विरोध कर रहे युवा देश का भविष्य हैं, और उन्हें कॉकरोच कहना या उन्हें न्याय से वंचित रखना अनुचित है। ठाकरे ने जोर देकर कहा कि नीट पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।