Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Unexplained Weight Loss: बिना डाइट और एक्सरसाइज वजन क्यों घट रहा है? जानें इसके पीछे की गंभीर बीमारि... खाड़ी क्षेत्र के मित्र देश भी अब डोनाल्ड ट्रंप से घबड़ाये ईरान ने वहां से गुजरते एक जहाज पर हमला किया इबोला का प्रकोप दक्षिण सूडान तक फैलने की आशंका प्रारंभिक अनुमान से कहीं बहुत ज्यादा है भूकंप का नुकसान कीर स्टारमर के अचानक इस्तीफा के बाद अगले पीएम की चर्चा उत्तर कोरिया की सैन्य शक्ति विस्तार से परेशान दक्षिण कोरिया यूरोप की भीषण गर्मी से एशियाई एसी निर्माताओं की चांदी Sharmistha Mukherjee on PM Modi: 'आप मोदी से नफरत या प्यार करें, लेकिन ब्रांड मोदी को नजरअंदाज नहीं ... Ketan Agarwal Murder Case: पुणे हत्याकांड में 'राजस्थान कनेक्शन'; आरोपी चेतन चौधरी का कौन है सिया गो...

सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद कर्नाटक में राजनीतिक विवाद

कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा

  • विभाग आवंटन से नाराजगी जतायी

  • आठ बार के विधायक रहे हैं वह

  • शिवकुमार के सामने नई चुनौती

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरुः कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार, 5 जून 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य मंत्रिमंडल में विभागों के आवंटन के महज कुछ घंटों के भीतर ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस अप्रत्याशित कदम ने राज्य की सत्तारूढ़ सरकार के भीतर व्याप्त आंतरिक असंतोष को सतह पर ला दिया है।

रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के पीछे का प्राथमिक कारण उन्हें आवंटित किए गए विभाग से उनकी गहरी नाराजगी है। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए वे किसी महत्वपूर्ण या भारी मंत्रालय की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्हें जो विभाग सौंपा गया, वह उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। अपनी इस नाराजगी को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के निर्णयों पर अपना कड़ा असंतोष जाहिर किया है।

रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। रेड्डी न केवल एक अनुभवी नेता हैं, बल्कि बेंगलुरु क्षेत्र में पार्टी का एक मजबूत स्तंभ भी माने जाते हैं। आठ बार के विधायक होने के नाते, राज्य की राजनीति में उनकी पकड़ और प्रभाव काफी गहरा है। उनके इस कदम से न केवल पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं, बल्कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन और पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की चुनौती भी मुख्यमंत्री के सामने खड़ी हो गई है।

वर्तमान में, सरकार की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। विपक्षी दल इस स्थिति का उपयोग सरकार की आंतरिक कमजोरी को उजागर करने के लिए कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस संकट का जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो यह राज्य सरकार की स्थिरता के लिए घातक साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें पार्टी आलाकमान पर टिकी हैं कि वे रामलिंगा रेड्डी को मनाने में सफल होते हैं या यह विवाद और अधिक गहराता है।