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Latehar Electricity News: वन विभाग की एनओसी में फंसी बिजली परियोजना; लातेहार के इन 4 गांवों में आज भी अंधेरा

लातेहार: हर गांव और हर घर तक बिजली पहुंचाने का सरकार का दावा लातेहार जिले के बॉर्डर इलाकों में पूरी तरह दम तोड़ता नजर आ रहा है। विभागीय समन्वय की भारी कमी के कारण मनिका और लातेहार प्रखंड के बीच स्थित परहिया टोला, पिपरा पत्थर, टेंगरा पत्थर और खीराखाड़ जैसे गांवों के लोग आज भी बिजली के लिए तरस रहे हैं। नक्सलवाद के खात्मे के बाद जब विकास की किरण इन क्षेत्रों तक पहुंचने लगी, तो ग्रामीणों में बिजली को लेकर भारी उत्साह था। सरकार की स्वीकृत योजना के तहत कार्य भी शुरू हुआ, लेकिन वन विभाग के हस्तक्षेप ने इस उम्मीद को फिलहाल अधर में लटका दिया है।

🚧 ग्रामीणों की मेहनत पर फिरा पानी: बिजली पोल के लिए खुद खोदे गड्ढे, फिर भी काम हुआ ठप

बिजली आने की खुशी में परहिया टोला और पिपरा पत्थर के ग्रामीण इतने उत्साहित थे कि उन्होंने विभाग के कर्मियों का सहयोग करते हुए स्वयं पोल लगाने के लिए गड्ढे तक खोद डाले थे। काम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा था, तभी वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और एनओसी का हवाला देकर कार्य को तत्काल प्रभाव से रोक दिया। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश उरांव, कुलदीप उरांव और फेकू परहिया ने बताया कि यह क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी और आदिम जनजातियों का है, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर हैं।

🌲 वन विभाग बनाम बिजली विभाग: क्या है एनओसी का पेच?

इस विवाद पर बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता राजदेव मेहता ने बताया कि वन विभाग द्वारा तकनीकी कारणों से कार्य रोका गया है और वरीय अधिकारियों के साथ बातचीत चल रही है। वहीं, रेंजर उमेश दुबे का कहना है कि बिजली विभाग द्वारा वन विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिए बिना ही काम किया जा रहा था, जिससे जंगल और पर्यावरण को संभावित नुकसान हो रहा था। विभागीय खींचतान के बीच आम ग्रामीण बिजली पाने के अपने मौलिक अधिकार से वंचित हैं।

⚡ जल्द समाधान की उम्मीद: क्या फिर लौटेगी गांवों में बिजली की उम्मीद?

ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से विकास की बाट जोह रहे हैं। विभाग अब यह दावा कर रहा है कि जल्द ही आपसी समन्वय बनाकर बिजली पहुंचाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह वन विभाग और विद्युत विभाग के बीच के इस तकनीकी गतिरोध को जल्द समाप्त करे ताकि आदिम जनजातीय गांवों में भी बिजली की रोशनी पहुंच सके।