कार्रवाई के बाद दोनों तरफ से चुप्पी का माहौल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वैश्विक खनन और धातु समूह वेदांता लिमिटेड पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता दिख रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के कथित उल्लंघन के एक मामले में वेदांता ग्रुप से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक परिसरों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। संघीय जांच एजेंसी द्वारा शुरू की गई यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन की गहन जांच का हिस्सा है।
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को देश के कई प्रमुख शहरों में यह छापेमारी की गई। इस जांच का मुख्य केंद्र दिल्ली और राजस्थान में स्थित वेदांता के कार्यालय और उनसे संबंधित अन्य ठिकाने रहे। यह पूरी जांच प्रक्रिया फेमा के नागरिक प्रावधानों के तहत संभावित अनियमितताओं और विदेशी लेनदेन में नियमों के उल्लंघन पर केंद्रित है।
हालांकि ईडी ने अभी तक उल्लंघन के स्वरूप के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया है, लेकिन इस छापेमारी ने कॉर्पोरेट जगत में हलचल पैदा कर दी है। वैसे इस पूरे मामले को आम लोग अब जेपी समूह की खरीद से जोड़कर भी देख रहे हैं, जिसमें अनिल अग्रवाल ने अडाणी के खिलाफ खड़े होने का न सिर्फ साहस किया बल्कि एनसीएलटी और कई संस्थानों के एकतरफा फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक में अपील कर दी थी। ऐसी सोच इसलिए है क्योंकि इससे पूर्व भी सरकारी फैसले का विरोध करने वालों के यहां ईडी की छापामारी के पूर्व उदाहरण मौजूद हैं।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए वेदांता समूह के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि कंपनी के परिसरों पर जांच हुई है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि समूह की ओर से जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है और उनसे जो भी सूचना या दस्तावेज मांगे गए हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रवक्ता ने आगे कहा, वेदांता लिमिटेड सभी लागू कानूनों और विनियामक विनियमों के अनुपालन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चूँकि यह मामला अभी एक चल रही नियामक प्रक्रिया के अंतर्गत है, इसलिए इस चरण पर हम इससे अधिक कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि वेदांता लिमिटेड वैश्विक स्तर पर धातु, तेल, गैस और महत्वपूर्ण खनिजों के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। कंपनी का व्यापारिक विस्तार केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके संचालन अफ्रीका, मध्य पूर्व और पूर्वी एशिया के विभिन्न देशों में भी फैले हुए हैं। इस छापेमारी के बाद बाजार विशेषज्ञों की नजरें अब ईडी द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और आगामी जांच की दिशा पर टिकी हैं।