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ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया का क्या होगा

युद्धविराम चर्चा के बीच ईरान की तीसरी ताकत पर नजर

एजेंसियां

बगदाद (इराक): इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र मिलिशिया (गुटों) पर अपने हथियार सरकारी अधिकारियों को सौंपने या कम से कम उन्हें राज्य के नियंत्रण में दिखाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर कताइब हिजबुल्लाह ने एक बड़ा बयान जारी किया है। कताइब हिजबुल्लाह इराक का एक प्रमुख सशस्त्र समूह है, जिसे अमेरिका एक आतंकवादी संगठन मानता है। इस समूह पर साल 2025 में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की हत्या करने और पूरे क्षेत्र में अमेरिकी व इजराइली ठिकानों पर हमले करने के आरोप हैं। गौरतलब है कि साल 2020 में अमेरिका ने बगदाद में आईआरजीसी कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी के साथ गाड़ी में जा रहे कताइब हिजबुल्लाह के नेता अबू महदी अल-मुहंदिस को एक ड्रोन हमले में मार गिराया था। यह समूह शोधकर्ता एलिजाबेथ त्सुरकोव और अमेरिकी पत्रकार शेली किटल्सन के अपहरण के पीछे भी रहा है।

उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के मीडिया नेटवर्क रुदाव के अनुसार, कताइब हिजबुल्लाह ने शनिवार को अन्य सशस्त्र गुटों द्वारा राज्य को हथियार सौंपने के प्रयासों का स्वागत किया है। समूह ने अनूठा प्रस्ताव रखते हुए कहा कि वह विशिष्ट सैन्य उपकरणों की जिम्मेदारी लेने और यहां तक ​​कि उनके लिए भुगतान करने (उन्हें खरीदने) को तैयार है। कताइब हिजबुल्लाह के प्रवक्ता और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अबू मुजाहिद अल-असाफ ने उन सशस्त्र भाइयों के फैसले की सराहना की जो इस्लामिक रेजिस्टेंस ऑफ इराक का हिस्सा नहीं हैं और जिन्होंने अपनी सैन्य गतिविधियां बंद कर हथियार सौंपने का मन बनाया है।

चूंकि कताइब हिजबुल्लाह के खुद के कई ब्रिगेड पीएमएफ के भीतर सक्रिय हैं, इसलिए पीएमएफ को हथियार सौंपने का सीधा मतलब खुद के हथियार खुद को ही सौंपना होगा। यह केवल एक कागजी दिखावा है, क्योंकि पीएमएफ का हिस्सा होने के बावजूद ये गुट अपनी मर्जी से पूरे मध्य पूर्व में स्वतंत्र रूप से हमले करते रहे हैं।

इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने कहा है कि वह कई ईरान-गठबंधन सशस्त्र समूहों के साथ परोक्ष बातचीत जारी रखे हुए हैं। शिया कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ने रुदाव को बताया कि पीएमएफ ढांचे से बाहर काम कर रहे तीन से चार गुटों के साथ चर्चा चल रही है, और ईद अल-अजहा की छुट्टियों के बाद एक अंतिम समझौता होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कताइब हिजबुल्लाह का यह कदम केवल एक रणनीतिक दिखावा है। वे केवल उन विशिष्ट हथियारों जैसे कि ड्रोन, आत्मघाती ड्रोन, क्रूज मिसाइलें और एंटी-आर्मर हथियारों का एक प्रतीकात्मक आत्मसमर्पण कर सकते हैं, जिन्हें संचालित करने के विशेषज्ञ इराकी सेना के पास नहीं हैं। इसके बाद वे शेल कंपनियों की तर्ज पर इन हथियारों को सरकार से वापस खरीदकर या पीएमएफ के जरिए घुमाकर दोबारा अपने पास रख लेंगे, जो हथियारों की एक तरह से लॉन्ड्रिंग जैसा होगा।