Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
छतरपुर: उद्घाटन से पहले ही केन नदी पर बने पुल में पड़ी दरारें, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल इंदौर से भोपाल तक कांग्रेस की 'युवा स्वाभिमान यात्रा': जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना, शुरू की ... शहडोल स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल: 108 एंबुलेंस के इंतजार में महिला की मौत, रास्ते में दिया ब... श्योपुर कलेक्टर शीला दाहिमा का सुरीला अंदाज: सावन सांस्कृतिक संध्या में लाइव सिंगिंग ने जीता लोगों क... सीधी: रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए जिला अभियोजन अधिकारी, लोकायुक्त टीम को देख सड़क पर फेंके नोट रतलाम: खेत सीमांकन विवाद से परेशान किसान चढ़ा पानी की टंकी पर, 'शोले' के वीरू जैसा दिखा नजारा Ujjain News: स्कूल कैंपस से निकले छात्र और तालाब में डूबे, जवाहर नवोदय विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही ... Jabalpur News: बरसाती नालों और खेतों में निकल रहे मगरमच्छ, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने लोगों को दी सतर्क ... Weather Update: दिल्ली में बारिश पर ब्रेक, यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट इंदौर मर्डर केस: सहायक डाक अधीक्षक उर्मिला सैनी की हत्या के 48 घंटे बाद भी आरोपी पति फरार, परिजनों क...

Supreme Court Update: कानून के छात्रों की उपस्थिति पर SC का बड़ा फैसला; हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

नई दिल्ली: कानून के छात्रों की अनिवार्य उपस्थिति (Attendance) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले साल के उस निर्देश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि केवल कम उपस्थिति के आधार पर छात्रों को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। यह आदेश बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है। कोर्ट ने अब इस मामले में 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

📜 क्या था 2016 का मामला?

यह कानूनी विवाद एमिटी यूनिवर्सिटी के एक छात्र की दुखद आत्महत्या के मामले से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था ताकि कानूनी शिक्षा के मानक और उपस्थिति संबंधी नियमों पर विस्तृत विचार किया जा सके।

🏛️ हाईकोर्ट का तर्क और विवादित फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि कानूनी शिक्षा केवल कक्षा में बैठने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कोर्ट का मानना था कि मूट कोर्ट, सेमिनार, मॉक पार्लियामेंट और वाद-विवाद जैसी गतिविधियों को भी अकादमिक क्रेडिट दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट के अनुसार, उपस्थिति के कठोर नियम छात्रों की रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को सीमित करते हैं। इसी ‘पैरा 249’ के तहत दिए गए इन निर्देशों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे अब फिर से उपस्थिति संबंधी नियमों को लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है।