Strait of Hormuz Updates: क्या है होर्मुज का नया सर्विस प्रोटोकॉल? जहां से होती है दुनिया की 20% तेल सप्लाई
तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों से टोल टैक्स लेने पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यानी इस अंतरराष्ट्रीय समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर होने के बाद ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से कोई टोल नहीं वसूल सकता है। लेकिन इसी बीच ईरान ने एक नया और चतुर कूटनीतिक दांव खेल दिया है। ईरान का आधिकारिक तौर पर कहना है कि तेहरान समझौते का सम्मान करते हुए होर्मुज में कोई ‘टॉल टैक्स’ तो नहीं लेगा, लेकिन जहाजों को दी जाने वाली पर्यावरण सुरक्षा और नौसैनिक सुरक्षा सेवा (Security Services) के नाम पर पैसा जरूर वसूलेगा। सोमवार को यह महत्वपूर्ण जानकारी ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मीडिया को दी। बाघेई के मुताबिक ‘टोल टैक्स’ शब्द के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान को बदनाम किया जा रहा है, जबकि यह केवल पश्चिमी मीडिया का दिया हुआ एक मनगढ़ंत शब्द है।
🌊 होर्मुज को पूरी तरह खोलने पर ईरान की सहमति: प्रवक्ता बाघेई बोले— ‘जहाजों को सुरक्षा देने का खर्च तो जरूर लेंगे’
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने साफ किया कि इस वैश्विक समझौते के लागू होने के बाद होर्मुज जलमार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने दलील दी कि इस बेहद संवेदनशील मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए हमारी नौसेना जो सेवाएं और संसाधन देगी, उसके एवज में फीस (सेवा शुल्क) तो जरूर ली जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि समुद्री पर्यावरण की रखवाली करना और उसे प्रदूषण मुक्त रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए फंड की आवश्यकता है। आपको बता दें कि होर्मुज फारस की खाड़ी का एकमात्र प्रवेश द्वार है, जहां से अंतरराष्ट्रीय कार्गो जहाज फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी में प्रवेश करते हैं। इसी अकेले रास्ते से पूरी दुनिया के कुल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई की जाती है। सऊदी अरब, यूएई, कतर और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से दुनिया को अपना कच्चा तेल और गैस बेचते हैं।
🇴🇲 ओमान के साथ मिलकर जल्द जारी होगा नया सर्विस प्रोटोकॉल: होर्मुज को प्रदूषण मुक्त और क्लीन रखने की है कोशिश
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस नए टैक्स और सुरक्षा ढांचे को कानूनी रूप देने के लिए हम बहुत जल्द पड़ोसी देश ओमान के साथ मिलकर होर्मुज जलमार्ग पर एक संयुक्त आधिकारिक प्रोटोकॉल (Hormuz Protocol) जारी करने जा रहे हैं। इस प्रोटोकॉल के तहत यह तय किया जाएगा कि हम विदेशी जहाजों को जो सुरक्षा और तकनीकी सेवाएं देंगे, उसके लिए कितना शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा, समुद्र को प्रदूषित होने से बचाने के लिए एक कड़ा ‘पर्यावरण टैक्स’ (Eco Tax) भी लागू किया जाएगा। ईरान का दावा है कि उनकी इस कोशिश का उद्देश्य होर्मुज के जलमार्ग को पूरी तरह क्लीन और सुरक्षित रखना है। आने वाले समय में जब ओमान के साथ यह आधिकारिक प्रोटोकॉल दुनिया के सामने जारी होगा, तब इस टैक्स की सटीक दरों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
⚓ 2026 की जंग के बाद ईरान ने लगाया था ₹10-10 लाख का टोल: भारत, चीन और पाकिस्तान के जहाजों को दी थी मुफ्त छूट
यदि इसके इतिहास और पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 28 फरवरी 2026 से पहले तक होर्मुज के इस अंतरराष्ट्रीय रास्ते से व्यावसायिक जहाजों को ले जाने के लिए किसी भी देश को कोई टोल या टैक्स नहीं देना होता था। लेकिन अमेरिका के साथ उपजे हालिया सैन्य तनाव और जंग जैसी स्थिति के बाद ईरान ने अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाते हुए इस समुद्री रास्ते पर कड़ा टोल सिस्टम लागू कर दिया था। इसके तहत गुजरने वाले मालवाहक जहाजों से सुरक्षा गारंटी के नाम पर 10-10 लाख रुपये जैसी भारी-भरकम राशि वसूली गई। हालांकि, भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के चलते भारतीय जहाजों से कोई पैसा नहीं वसूला गया था। इसके साथ ही ईरान के रणनीतिक साझेदार पाकिस्तान और चीन के जहाज भी होर्मुज से बिना कोई टैक्स दिए मुफ्त में गुजरते रहे। ईरान ने होर्मुज में टोल वसूलने के काम को व्यवस्थित करने के लिए बाकायदा एक अलग मंत्रालय बनाने की भी घोषणा की थी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अधीन इस तंत्र को रखा गया था। वर्तमान में भी होर्मुज की पूरी चौकीदारी आईआरजीसी के हथियारों से लैस जवान ही कर रहे हैं।
📜 सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: परमाणु हथियार न बनाने और टोल बंद करने की शर्त पर हटेगी आर्थिक पाबंदी
अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क सीएनएन (CNN) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पर्दे के पीछे चल रही लंबी कूटनीतिक वार्ताओं के बाद आखिरकार ईरान और अमेरिका के बीच एक अंतरिम परमाणु समझौते (Interim Nuclear Deal) पर पूर्ण सहमति बन गई है। इस ऐतिहासिक समझौते की आधिकारिक घोषणा दोनों देशों द्वारा कभी भी की जा सकती है। इस सीक्रेट समझौते के मुख्य मसौदे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बिना किसी बाधा के पूरी तरह से खोलना होगा और इस रास्ते पर वह भविष्य में कोई टोल नहीं वसूलेगा। इसके अलावा, ईरान ने भविष्य में कभी भी सैन्य उपयोग के लिए परमाणु हथियार न बनाने की बात पर भी अपनी लिखित सहमति दी है। इन्हीं सख्त शर्तों के बदले में अमेरिका और यूरोपीय देश ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) में बड़ी ढील देंगे, जिससे ईरान को दुनिया भर में अपना तेल बेचने की कानूनी छूट मिल जाएगी और अमेरिका उसके जब्त किए गए अरबों डॉलर भी वापस लौटा देगा।