Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
राज्यसभा चुनाव में तेज हुआ जोड़ घटाव का खेल Solar Power Plant in Sitapur: रक्षा भूमि पर देश का पहला बड़ा सोलर प्रोजेक्ट; राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी Yamuna O-Zone Delhi: यमुना किनारे रहने वालों को बड़ी राहत; बीजेपी सांसदों ने कहा- 'पुरानी बस्तियों पर... PM Modi Historic Record: पीएम मोदी बने देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री; नेहरू का रिकॉ... INDIA Alliance Meeting: गठबंधन का पीएम चेहरा तय करने की मांग; संजय राउत बोले- 'अगर मोदी बन सकते हैं ... Bihar Industrial Policy: बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान; 30 दिनों में नहीं मिली मंजूरी तो आवेदन होग... MP Rajya Sabha Election: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; मध्य प्रदेश की तीनों सीटों पर BJP की जीत प... Baghpat Crime News: बागपत में दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग; टेंट व्यवसायी के पिता-पुत्र की हत्या, इला... Jaipur Fire Accident: जयपुर की अवैध पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, कई गंभीर Delhi Weather Alert: दिल्ली-NCR में फिर बदलेगा मौसम; 11 जून को 70 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बा...

केरल की कचकच के बाद अब कर्नाटक का संकट

कांग्रेस के समक्ष नेतृत्व का नया सवाल

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरुः केरल में नेतृत्व के एक कड़े गतिरोध और अंदरूनी कलह से जैसे-तैसे उबरने के बाद, कांग्रेस हाईकमान एक बार फिर कर्नाटक के शक्ति संघर्ष (पावर टसल) में उलझ गया है। सिद्धारमैया गुट की ओर से कैबिनेट में फेरबदल की बढ़ती मांग के साथ ही, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही रस्साकशी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।

नई दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान के लिए तिरुवनंतपुरम से लेकर बेंगलुरु तक का रास्ता राजनीतिक सिरदर्दी से भरा साबित हो रहा है। केरल के नेतृत्व संकट को सुलझाने में 10 से अधिक दिन बिताने के बाद, पार्टी को अब कर्नाटक में नए ड्रामे से निपटना पड़ रहा है। साल 2026 के चुनावी मौसम के खत्म होते ही कांग्रेस की यह अंदरूनी कलह फिर से सतह पर आ गई है। पार्टी के विधायकों और खुद मुख्यमंत्री द्वारा कैबिनेट में बदलाव की मांग तेज होती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान से बैठक का समय मांगा है और वे इस संभावित फेरबदल पर आलाकमान से सीधी चर्चा करना चाहते हैं।

दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक उन पर मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। शिवकुमार ने कथित तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि कोई भी नया फैसला लेने से पहले उनके साथ किए गए ढाई साल के मुख्यमंत्री वाले वादे पर विचार किया जाना चाहिए।

कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता का यह संघर्ष उसी दिन से शुरू हो गया था, जब साल 2023 में सिद्धारमैया ने राज्य सरकार के मुखिया के रूप में शपथ ली थी। डी.के. शिवकुमार का समर्थन करने वाले कांग्रेस विधायकों का दावा रहा है कि हाईकमान की मौजूदगी में दोनों नेताओं के बीच 50-50 प्रतिशत (ढाई-ढाई साल) के फॉर्मूले पर सत्ता की साझेदारी का समझौता हुआ था। हालांकि समय-समय पर पार्टी के भीतर अस्थायी युद्धविराम और शांति की कोशिशें होती रहीं, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर यह लड़ाई कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अब राजनीतिक बयानों और गुटीय दबाव के चलते यह विवाद एक बार फिर कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।