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Kashmir Weather Update: कश्मीर में भी टूटा गर्मी का रिकॉर्ड; मई में जून-जुलाई जैसी तपिश, श्रीनगर में पारा 31 डिग्री के पार

श्रीनगर: पूरे उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ और जानलेवा गर्मी का सीधा व व्यापक असर अब धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में भी साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है। आमतौर पर अपने बारहमासी सुहावने और बेहद ठंडे मौसम के लिए विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले कश्मीर में इस बार मई के महीने में ही समय से पहले आई तेज गर्मी और कड़कती धूप ने स्थानीय लोगों को पूरी तरह से परेशान और बेहाल कर दिया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, राजधानी श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी के कई प्रमुख मैदानी और पहाड़ी इलाकों में वर्तमान दैनिक तापमान सामान्य औसत से 5 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो कि एक चिंताजनक संकेत है।

📊 श्रीनगर में पारा सामान्य से 5.3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज: काजीगुंड, कोकरनाग और गुलमर्ग में भी तापमान ने पकड़ी रफ्तार

मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते 19 मई को श्रीनगर का अधिकतम तापमान 30.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सामान्य औसत तापमान से 5.3 डिग्री सेल्सियस अधिक है। इसी तरह घाटी के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का हाल भी गर्म रहा, जहाँ काजीगुंड में अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस, कोकरनाग में 29.2 डिग्री सेल्सियस और समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में भी तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड किया गया। पहाड़ों पर इस तरह पारा चढ़ना वहां मौजूद ग्लेशियरों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी ठीक नहीं माना जा रहा है।

🛒 ठंडी वादियों में अचानक बढ़ी एयर कंडीशनर (AC) और कूलर की मांग: पिछले साल की किल्लत को देखते हुए डीलर्स ने जुटाया स्टॉक

समय से पहले और अप्रत्याशित रूप से बढ़ी इस भीषण गर्मी के कारण कश्मीर के इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहाँ एयर कंडीशनर (AC) और रूम कूलर्स की मांग में ऐतिहासिक और अभूतपूर्व तेजी आई है। स्थानीय एसी विक्रेताओं और थोक व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल गर्मियों के अंतिम दौर में इन कूलिंग उपकरणों की अचानक भारी कमी (शॉर्टेज) हो गई थी। इसी कड़वे अनुभव से सबक लेते हुए स्थानीय डीलर्स ने इस बार सीजन की शुरुआत में ही देश के बड़े मैन्युफैक्चरर्स से पर्याप्त स्टॉक मंगाकर अपने गोदामों में पहले से रख लिया था। एक बड़े शोरूम विक्रेता के अनुसार, पहले कश्मीर में एसी की जरूरत नाममात्र पड़ती थी, लेकिन अब हर साल ग्लोबल वार्मिंग के चलते मांग बढ़ रही है और इस बार मई के पहले हफ्ते से ही ग्राहक धड़ाधड़ एसी खरीदने आ रहे हैं।

🌱 बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन (Ecological Balance) से स्थानीय दुकानदार और नागरिक चिंतित: जून-जुलाई जैसी तपन मई में ही शुरू

श्रीनगर और लाल चौक के स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि मौसम चक्र में आए इस अचानक और विनाशकारी बदलाव ने उन्हें अंदर तक हैरान और चिंतित कर दिया है। एक स्थानीय प्रमुख दुकानदार ने बताया कि उन्होंने अपनी दुकान में ग्राहकों को गर्मी से राहत देने के लिए इस बार दो नए बड़े एयर कंडीशनर लगवाए हैं, जिसकी कल्पना उन्होंने कुछ साल पहले तक कभी नहीं की थी। समाजसेवियों और पर्यावरणविदों का दृढ़ता से मानना है कि अंधाधुंध निर्माण, पेड़ों की कटाई और कार्बन उत्सर्जन के कारण कश्मीर का नाजुक पर्यावरणीय संतुलन (Ecological Balance) पूरी तरह से डिस्टर्ब यानी प्रभावित हुआ है। यही कारण है कि कश्मीर में आमतौर पर जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में देखी जाने वाली उमस और गर्मी अब मई के महीने में ही देखने को मिल रही है।

🌡️ मई महीने की शुरुआत में ही टूट चुके हैं कई बड़े रिकॉर्ड: विशेषज्ञों ने आने वाले हफ्तों में और तापमान बढ़ने की जताई आशंका

उल्लेखनीय है कि इसी चालू महीने की बीती 9 मई को श्रीनगर में अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य से करीब 7.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इसके अलावा काजीगुंड, पहलगाम, कुपवाड़ा और पहाड़ों की रानी गुलमर्ग में भी तापमान ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और पारा सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि वायुमंडल और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की यही शुष्क स्थिति बनी रही और पहाड़ों पर प्री-मानसून की अच्छी बारिश नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में कश्मीर घाटी के मैदानी इलाकों में गर्मी का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय कृषि और पर्यटन उद्योग पर भी विपरीत असर पड़ने की पूरी आशंका है।