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दिल्ली आबकारी नीति मामला अब दूसरी अदालत में

हाईकोर्ट में अब 25 मई को होगी सुनवाई

  • स्वर्णकांता शर्मा ने मामला छोड़ा है

  • जस्टिस मनोज जैन सुनवाई करेंगे

  • सभी को सूचित करने का निर्देश जारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आबकारी नीति मामले में सभी आरोपियों को बरी (डिस्चार्ज) करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए 25 मई की तारीख तय की है। इसके साथ ही अदालत ने जांच एजेंसी को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक को बेंच (पीठ) में हुए बदलाव के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति मनोज जैन ने कहा, उन्हें सूचित किया जाए कि यह मामला अब इस अदालत को आवंटित किया गया है। ताकि यदि उन्हें वर्तमान याचिका पर कुछ कहना हो या जवाब देना हो, तो वे दे सकें। उन्हें नोटिस तामील होने दिया जाए। एक बार जब सभी लोग यहां उपस्थित हो जाएंगे, तो हम सुनवाई का एक शेड्यूल (समय-सारणी) तैयार करेंगे।

ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की इस याचिका को पिछले हफ्ते न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा अपनी अदालत से रिलीज किए जाने के बाद न्यायमूर्ति जैन के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।

इससे पहले, 27 फरवरी को निचली अदालत ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच के सामने टिकने में पूरी तरह असमर्थ है और पूरी तरह से खारिज होने योग्य है।

इसके बाद, केजरीवाल, सिसोदिया, पाठक और कुछ अन्य प्रतिवादियों ने पूर्वाग्रह और हितों के टकराव की आशंका जताते हुए न्यायमूर्ति शर्मा से इस मामले की सुनवाई से हटने की मांग की थी। 20 अप्रैल को न्यायमूर्ति शर्मा द्वारा उनकी इस अर्जी को खारिज किए जाने के बाद, आप नेताओं ने उन्हें पत्र लिखकर कहा था कि वे उनके सामने व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से पेश नहीं होंगे और महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलेंगे।

हालांकि, 14 मई को न्यायमूर्ति शर्मा ने अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की और स्पष्ट किया कि मुख्य मामले को दूसरी बेंच के पास भेजा जाएगा।

सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि आरोपियों को बरी करने का निचली अदालत का आदेश कानून की नजर में किसी भी अदालत की जांच के सामने टिक नहीं सकता। यह देखते हुए कि तीन प्रमुख प्रतिवादी—केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक—अदालत में प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे न्यायमूर्ति जैन ने सुनवाई को 25 मई तक के लिए टाल दिया। उन्होंने कहा, आदर्श स्थिति यही है कि सभी लोग यहां मौजूद हों और सबको सुना जाए।