साख पर सवाल, प्रोफेसर गिरोह और राजनीति का उबाल
भारत की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा, नीट-यूजी 2026 एक बार फिर विवादों के भंवर में है। देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे ने तब तूल पकड़ लिया जब परीक्षा के पवित्रता पर गंभीर सवाल उठे। 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा में धांधली की पुष्टि होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे निरस्त कर दिया और मामले की कमान देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी।
यह संकट केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि देश की पूरी परीक्षा प्रणाली और लाखों परिवारों के भरोसे पर एक गहरा आघात है। 7 मई को शुरुआती शिकायत मिलने और 12 मई तक पुख्ता सबूत मिलने के बाद, शिक्षा मंत्रालय की सिफारिश पर सीबीआई ने मामले की कमान संभाली। जांच एजेंसी ने दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा जैसे राज्यों में छापेमारी कर एक बड़े अंतर-राज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है।
सीबीआई ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि पेपर लीक के तार कितने गहरे और संगठित रूप से फैले हुए थे। जांच का मुख्य केंद्र बिंदु परीक्षा प्रक्रिया के भीतर कमांड की विफलता को खोजना है। डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स और मनी ट्रेल की मदद से इस पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के गोपनीय तंत्र में सेंधमारी कहां से और कैसे हुई।
इस पूरे घोटाले में सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक पहलू शिक्षा जगत से जुड़े प्रतिष्ठित चेहरों का बेनकाब होना है। सीबीआई ने पुणे और लातूर से जुड़े मुख्य साजिशकर्ताओं—केमिस्ट्री के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी और बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की सीनियर लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे—को गिरफ्तार किया है।
आरोप हैं कि ये दोनों प्रोफेसर एनटीए के पेपर सेटिंग पैनल और विशेषज्ञ प्रक्रिया से जुड़े हुए थे, जिसके कारण उनकी पहुंच सीधे मूल प्रश्नपत्रों तक थी। जांच के अनुसार, आरोपियों ने छात्रों से लाखों रुपये की डीलिंग की। उन्होंने प्रश्नपत्रों को सीधे बाजार में छापने के बजाय एक शातिर तरीका अपनाया। परीक्षा से कुछ दिन पहले, अपने घरों पर चुनिंदा छात्रों के लिए विशेष सीक्रेट कोचिंग क्लास बुलाई गई।
इन कक्षाओं में प्रोफेसरों ने छात्रों को सीधे प्रश्न, विकल्प और उनके सही उत्तर बोलकर लिखवाए। छात्रों द्वारा कॉपियों में लिखे गए ये प्रश्न वास्तविक नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मैच कर गए। शिक्षा के इन मंदिरों में रचे गए इस आपराधिक खेल ने योग्य और दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को हाशिए पर धकेल दिया।
चौतरफा घिरी सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोर्चा संभाला। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी हुई है और सरकार इसकी पूरी नैतिक जिम्मेदारी लेती है। शिक्षा मंत्री ने सख्त लहजे में कहा, सीबीआई जांच की गहराई तक जाएगी और इस लीक के पीछे जो भी होगा—चाहे वह एनटीए के भीतर का अधिकारी हो या कोई बाहरी शिक्षा माफिया—उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार छात्रों के अधिकारों से समझौता नहीं करेगी।
भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्री ने दो बड़े एलानों की घोषणा की। पहला, इस वर्ष प्रभावित छात्रों के लिए 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। दूसरा सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव यह कि अगले वर्ष से नीट-यूजी परीक्षा को पारंपरिक ओएमआर पेन-पेपर मोड से बदलकर पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट फॉर्मेट में कराया जाएगा, ताकि साइबर सुरक्षा को मजबूत कर ऐसी मैन्युअल लीकेज को हमेशा के लिए रोका जा सके।
इस मुद्दे पर देश का सियासी पारा भी पूरी तरह चढ़ चुका है। कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए राष्ट्रव्यापी मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय घोटाला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में देश की शिक्षा प्रणाली घोटालों का कारखाना बनकर रह गई है, जहां अमीर पैसे के दम पर सीटें खरीद रहे हैं और गरीब व मध्यम वर्ग के प्रतिभावान बच्चे पिस रहे हैं।
नीट-यूजी 2026 का यह घटनाक्रम भारत की राष्ट्रीय साख और देश के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य के लिए एक चेतावनी है। जब तक प्रश्नपत्र तैयार करने वाली सर्वोच्च समितियों में बैठे ऐसे भ्रष्ट शिक्षाविदों और दलालों के खिलाफ कठोरतम और नजीर बनने वाली कार्रवाई नहीं होगी, तब तक छात्रों के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल करना नामुमकिन होगा। भरोसे का टूटना इस सरकार की सेहत के लिए भी कोई बहुत शुभ संकेत नहीं है, इसे भली भांति समझ लेना चाहिए।