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सीबीआई की जांच के दायरे में फिर से भाजपा नेता का संबंध

राजस्थान के दिनेश बीवाल और भाई शामिल था

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पेपर लीक मामले की जांच जैसे ही केंद्रीय जांच ब्यूरो के हाथों में पहुंची, राजस्थान से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सीबीआई ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें जयपुर के दिनेश बीवाल और उनके भाई मांगीलाल बीवाल शामिल हैं। दिनेश बीवाल के संबंध राजस्थान भाजपा की युवा इकाई, भारतीय जनता युवा मोर्चा से बताए जा रहे हैं, जिससे इस पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।

सीबीआई की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पिछले साल बीवाल परिवार के चार सदस्यों ने नीट परीक्षा पास की थी। सूत्रों के अनुसार, अब यह संदेह गहरा गया है कि पिछले साल भी इस परिवार की अवैध रूप से प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। इस साल की साजिश में दिनेश बीवाल ने गुरुग्राम के एक करियर काउंसलर यश यादव से कथित तौर पर 15 लाख रुपये में पेपर खरीदा था। यह सौदा परीक्षा से चार दिन पहले, यानी 29 अप्रैल को ही हो गया था।

गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में नासिक के शुभम खैरनार और गुरुग्राम के यश यादव शामिल हैं। जांच से पता चला है कि शुभम खैरनार को प्रश्नपत्र की भौतिक प्रति महाराष्ट्र के धनंजय लोखंडे ने कूरियर के जरिए भेजी थी।

दिनेश बीवाल की गिरफ्तारी के बाद राजस्थान की राजनीति गरमा गई है। दिनेश के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भाजपा के कई दिग्गज नेताओं और विधायकों के साथ उनकी तस्वीरें मौजूद हैं। हालांकि, राजस्थान बीजेवाईएम के अध्यक्ष शंकर गोरा ने स्पष्ट किया है कि दिनेश संगठन में किसी आधिकारिक पद पर नहीं थे।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल शर्मा सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि राज्य पुलिस के विशेष अभियान समूह ने इस मामले में समय रहते प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की और जांच में देरी क्यों हुई।

शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, चोरी और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।

यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे देश की परीक्षा प्रणाली और राजनीतिक गलियारों में शुचिता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सीबीआई अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जिनसे यह पता चल सके कि पेपर लीक का यह नेटवर्क बिहार, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों तक कैसे फैला हुआ था।