वैज्ञानिकों ने अब जाकर खोजा वह संजीवनी जीन
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कई जीव प्राकृतिक तौर पर ऐसा करते हैं
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प्रजातियों के बीच साझा पुनर्जनन जीन
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जीन थेरेपी की बदौलत ऐसा संभव होगा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः वैज्ञानिकों ने मैक्सिकन एक्सोलोटल (सलामैंडर), जेब्राफिश और चूहों के अध्ययन के दौरान जीन का एक ऐसा साझा समूह खोजा है, जो भविष्य में मानव अंगों के पुनर्जनन के लिए उपचार विकसित करने में मददगार साबित हो सकता है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित यह शोध पुनर्योजी चिकित्सा और जीन थेरेपी की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
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वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी में जीव विज्ञान के सहायक प्रोफेसर जोश क्यूरी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण शोध में तीन अलग-अलग प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया। शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि अलग-अलग प्रजातियों में पुनर्जनन की प्रक्रिया कैसे काम करती है। उन्होंने पाया कि सलामैंडर, जेब्राफिश और चूहों जैसे भिन्न जीवों में पुनर्जनन को नियंत्रित करने वाले जेनेटिक प्रोग्राम काफी हद तक समान हैं। इस परियोजना में ड्यूक यूनिवर्सिटी के प्लास्टिक सर्जन डेविड ए. ब्राउन और विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के केनेथ डी. पॉस भी शामिल थे।
आंकड़ों के अनुसार, मधुमेह, दुर्घटनाओं और कैंसर जैसी बीमारियों के कारण दुनिया भर में हर साल 10 लाख से अधिक अंगों को काटना पड़ता है। वैज्ञानिक लंबे समय से कृत्रिम अंगों से आगे बढ़कर प्राकृतिक अंगों, संवेदनाओं और कार्यों को बहाल करने वाले उपचारों की तलाश कर रहे थे। इस अध्ययन में पाया गया कि एसपी जीन समूह इस दिशा में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।
शोध के लिए एक्सोलोटल को उनकी पूरी पूंछ, अंग और हृदय जैसे अंगों को दोबारा उगाने की क्षमता के कारण चुना गया। जेब्राफिश अपने पंख और रेटिना जैसे अंगों को बार-बार विकसित कर सकती है। वहीं, चूहों को इसलिए शामिल किया गया क्योंकि वे मनुष्यों की तरह स्तनधारी हैं। चूहे अपने पैरों की उंगलियों के अग्रभाग को पुनर्जीवित कर सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मनुष्य कभी-कभी नाखून के बिस्तर के सुरक्षित रहने पर अपनी उंगलियों के पोरों को दोबारा उगा लेते हैं।
क्यूरी की टीम ने पाया कि तीनों प्रजातियों में पुनर्जनन के दौरान त्वचा के ऊतकों में एसपी6 और एसपी 8 नामक दो जीन सक्रिय हो गए। सलामैंडर पर किए गए क्रिस्पर जीन-एडिटिंग प्रयोगों से पता चला कि एसपी 8 जीन के बिना वे अपनी हड्डियों को ठीक से विकसित नहीं कर पाए। चूहों में भी इसी तरह की समस्याएं देखी गईं।
इन निष्कर्षों के आधार पर, शोधकर्ताओं ने एक वायरल जीन थेरेपी तैयार की, जिसने एफजीएफ8 नामक अणु को सक्रिय किया। चूहों पर किए गए परीक्षण में इस थेरेपी ने हड्डियों के विकास को प्रोत्साहित किया और खोई हुई पुनर्जनन क्षमता को आंशिक रूप से बहाल कर दिया। हालांकि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह स्टेम सेल थेरेपी और बायोइंजीनियर्ड समाधानों के साथ मिलकर मानव अंगों को दोबारा उगाने का सपना सच कर सकता है।
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