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एआईएडीएमके में अब फूट के स्पष्ट संकेत

तमिलनाडु की राजनीति में अब भी लगातार गर्मी

  • अलग अलग गुटों में पहुंचे विधायक

  • छोटा समूह पलानीस्वामी के साथ

  • पार्टी प्रमुख से इस्तीफे की मांग

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) में आंतरिक कलह और दरार के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। सोमवार को विधानसभा में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पार्टी के 47 विधायक दो अलग-अलग समूहों में पहुँचे, जिससे पार्टी के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

खबरों के अनुसार, 11 विधायकों का एक छोटा समूह पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ विधानसभा पहुँचा। वहीं, वरिष्ठ नेता सी.वी. षणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व में 36 विधायकों का एक बड़ा समूह अलग से पहुँचा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लगातार चार चुनावी हार के बाद कई विधायक और पूर्व मंत्री पलानीस्वामी के नेतृत्व से नाखुश हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी महज 47 सीटों पर सिमट गई है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, षणमुगम के करीबी नेताओं ने बार-बार होने वाली हार के लिए पलानीस्वामी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने की मांग की है। हालांकि, चर्चा है कि पलानीस्वामी इस्तीफा देने के लिए तैयार नहीं हैं। ईपीएस खेमे और षणमुगम के नेतृत्व वाले गुट के बीच बढ़ती खाई ने पार्टी में संभावित विभाजन का डर पैदा कर दिया है। इससे पहले ऐसी चर्चाएँ भी गर्म थीं कि षणमुगम गुट अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम के साथ गठबंधन कर सकता है, जो उस समय सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने की कोशिश कर रही थी।

पिछले हफ्ते षणमुगम सहित 30 से अधिक विधायकों ने पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में डेरा डाला था। बाद में ईपीएस खुद अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में वहां पहुँचे थे। माना जा रहा है कि लगभग 28 विधायक टीवीके के साथ करीबी संबंधों के पक्ष में हैं। विद्रोही खेमे से जुड़ी निर्वाचित विधायक लीमा रोज़ का नाम भी चर्चा में है, जिनके दामाद आधव अर्जुना टीवीके के वरिष्ठ नेता हैं और विजय के करीबी माने जाते हैं।

ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि एआईएडीएमके, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को छोड़ने की संभावना तलाश रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विजय की पार्टी टीवीके को सत्ता में आने से रोकने के लिए एआईएडीएमके अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी डीएमके के साथ एक अभूतपूर्व राजनीतिक तालमेल बैठा सकती है।