रोमानिया के फिर से गहराया राजनीतिक संकट
बुखारेस्टः यूरोपीय संघ और नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य देश रोमानिया में मंगलवार को एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के तहत यूरोपीय समर्थक प्रधानमंत्री इली बोलोन की सरकार गिर गई। सोशल डेमोक्रेट्स, जो कभी सरकार में बोलोन के सहयोगी थे, और धुर दक्षिणपंथी दलों ने हाथ मिलाकर संसद में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया। यूक्रेन की सीमा से लगे इस रणनीतिक देश में इस घटनाक्रम ने गहरे राजनीतिक संकट और अस्थिरता को जन्म दे दिया है। 464 सीटों वाली संसद में इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 281 वोट पड़े। हालांकि प्रधानमंत्री बोलोन की लिबरल पार्टी और उनके सहयोगियों ने सदन में उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन उन्होंने मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
वामपंथी झुकाव वाली सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी पर अब कट्टरपंथी राजनीति को वैध बनाने के आरोप लग रहे हैं, क्योंकि उन्होंने सरकार गिराने के लिए मुख्य धुर दक्षिणपंथी पार्टी एयूआर के साथ गठबंधन किया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले महीने ही सोशल डेमोक्रेट्स ने घाटे को कम करने के लिए लागू किए गए कड़े मितव्ययिता उपायों के विरोध में सरकार का साथ छोड़ दिया था।
एयूआर के नेता जॉर्ज सिमियन ने इस जीत को जनता की आवाज बताया है। हालिया सर्वेक्षणों में एयूआर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और वह लगभग 37 प्रतिशत समर्थन के साथ देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है, जिसने सोशल डेमोक्रेट्स को भी पीछे छोड़ दिया है।
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच रोमानिया के यूरोपीय समर्थक राष्ट्रपति निकुसर डैन ने देश को आश्वस्त किया है कि 1.9 करोड़ की आबादी वाला यह देश अपनी पश्चिम समर्थक दिशा को बरकरार रखेगा। उन्होंने धुर दक्षिणपंथी सरकार के गठन या समय से पूर्व चुनाव की संभावना को फिलहाल खारिज कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि नई सरकार बनाने के लिए बातचीत शुरू हो गई है और मुख्य पश्चिम समर्थक दलों के बीच देश की व्यापक नीतियों को लेकर आम सहमति है। दूसरी ओर, सोशल डेमोक्रेट नेता सोरिन ग्रिंडेनु ने बोलोन से इस्तीफे की मांग करते हुए एक जिम्मेदार समाधान खोजने की बात कही है।
मतदान से पहले संसद में अपना बचाव करते हुए प्रधानमंत्री बोलोन ने अविश्वास प्रस्ताव को छलपूर्ण और बनावटी करार दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि उनके द्वारा उठाए गए सुधारवादी कदम देश की तत्कालीन आर्थिक जरूरतों के लिए अनिवार्य थे। हालांकि, कानून के अनुसार बोलोन और उनका मंत्रिमंडल नई सरकार के शपथ लेने तक सीमित शक्तियों के साथ पद पर बने रह सकते हैं। दिसंबर 2024 में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों के कारण राष्ट्रपति चुनाव रद्द होने के बाद देश में जो अस्थिरता शुरू हुई थी, वह इस नए घटनाक्रम से और अधिक जटिल होती दिख रही है।