भारत के उपहार की औपचारिक शुरुआत जमैका में संपन्न
एजेंसियां
नईदिल्लीः भारत और जमैका के बीच गहरे सांस्कृतिक और खेल संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जमैका के प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस के साथ मिलकर किंग्स्टन के ऐतिहासिक सबीना पार्क क्रिकेट स्टेडियम में एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड राष्ट्र को समर्पित किया। भारत द्वारा उपहार में दिए गए इस स्कोरबोर्ड को दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग और अटूट मित्रता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने बेहद भावुक और प्रभावशाली संदेश लिखा। उन्होंने कहा, भारत-जमैका की कहानी रनों में लिखी गई है, सम्मान में लिखी गई है और दोस्ती में लिखी गई है। प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस के साथ सबीना पार्क में भारत द्वारा भेंट किए गए इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड को औपचारिक रूप से समर्पित किया। उन्होंने आगे कामना करते हुए लिखा, यह स्कोरबोर्ड आने वाली कई महान पारियों की गिनती करे और उनमें से सबसे महत्वपूर्ण पारी भारत-जमैका की दोस्ती की हो। इस अवसर पर उन्होंने जमैका के महान क्रिकेटर क्रिस गेल की कमी को भी महसूस किया और उनका जिक्र किया।
अपनी जमैका यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों के साथ भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस द्वारा भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना किए जाने पर खुशी जताई। जयशंकर ने प्रवासियों के साथ भारत में हो रहे बड़े बदलावों, विशेषकर बुनियादी ढांचे के विकास, मानव संसाधन विकास और तकनीक आधारित शासन के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे भारत आज उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
विदेश मंत्री का यह दौरा ऐतिहासिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने ओल्ड हार्बर का दौरा किया, जो वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ 180 साल से भी पहले पहले भारतीय जमैका पहुंचे थे। उन्होंने वहाँ भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत की और इस बात की सराहना की कि कैसे उन्होंने सदियों बाद भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को संजो कर रखा है। जमैका के बाद जयशंकर सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो का भी दौरा करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन कैरेबियन देशों का भारत के साथ एक विशेष जुड़ाव है, जिसका मुख्य कारण यहाँ गिरमिटिया समुदायों की उपस्थिति है। गिरमिटिया उन भारतीय बंधुआ मजदूरों को कहा जाता है जो 19वीं शताब्दी के मध्य और अंत में ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए भारत से गए थे और बाद में वहीं बस गए। गिरमिटिया शब्द दरअसल एग्रीमेंट शब्द का ही अपभ्रंश है, जो उस अनुबंध को संदर्भित करता है जिसके तहत वे प्रवासी वहां गए थे। यह दौरा भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति और प्रवासी भारतीयों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।