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आईएएस एन प्रशांत आठवीं बार निलंबित

नये मीडिया बयानों से सरकारी महकमा फिर नाराज

  • छह मई को समाप्त होना था निलंबन

  • बार बार सरकार की आलोचना करते रहे

  • वरीय अधिकारियों पर भी कड़ी टिप्पणी की

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एन. प्रशांत को एक बार फिर से निलंबित कर दिया है। यह उनके सेवाकाल के दौरान उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आठवां अवसर है। सरकार का यह ताजा कदम प्रशांत द्वारा समाचार रिपोर्टों, साक्षात्कारों, वीडियो सामग्रियों, ऑनलाइन प्रकाशनों और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार की निरंतर आलोचना करने के बाद उठाया गया है। यह निलंबन ऐसे समय में आया है जब उनके पिछले निलंबन की अवधि 6 मई को समाप्त होने वाली थी।

निलंबन के नए आदेश में सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशांत का हालिया आचरण अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य से अपेक्षित संयम, विवेक और राजनीतिक तटस्थता के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। आदेश में कहा गया है कि उनके द्वारा दिए गए बयान बिना किसी पूर्व अनुमति के थे और इनसे प्रशासन में जनता के विश्वास को ठेस पहुँच सकती है। हालांकि, इस नए आदेश में यह निर्दिष्ट नहीं किया गया है कि यह निलंबन कब तक प्रभावी रहेगा।

एन. प्रशांत और केरल सरकार के बीच संघर्ष काफी पुराना है। उन्हें पहली बार 2022 में एक फेसबुक पोस्ट के लिए निलंबित किया गया था, जिसमें उन्होंने नौकरशाही और सरकारी नीतियों की आलोचना की थी। इसके बाद उनके निलंबन की अवधि को समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा। प्रशांत ने अपने निलंबन को सीधे तौर पर राज्य प्रशासन के भीतर भ्रष्टाचार को उजागर करने का परिणाम बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया नियमों के उल्लंघन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्ता का दुरुपयोग करार दिया है।

प्रशांत ने हाल ही में राज्य के शीर्ष नौकरशाहों, जिनमें मुख्य सचिव ए. जयतिलक और पूर्व मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन शामिल हैं, के खिलाफ भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कदाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से प्राप्त रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया कि मुख्य सचिव जयतिलक पिछले दो वर्षों में महीने में औसतन पांच दिन से भी कम कार्यालय उपस्थित रहे। इसके अलावा, प्रशांत ने वायनाड के विवादित मुत्तिल वृक्ष कटाई मामले का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जयतिलक द्वारा जारी एक विवादास्पद आदेश के कारण सरकार को 12 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

उन्होंने पीएम-अजय आवास योजना में भ्रष्टाचार, फर्जी प्रशिक्षण परियोजनाओं और स्पाइसेस बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में जयतिलक के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशांत का दावा है कि मुख्य सचिव बनने के बाद जयतिलक ने सुनिश्चित किया कि उनके खिलाफ चल रहे सभी मामले बंद कर दिए जाएं। वर्तमान में, एन. प्रशांत की यह आठवीं बार हुई निलंबन की कार्रवाई केरल के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जहाँ एक ओर सरकार अनुशासन की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपों ने शासन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।