Dabra: मध्य प्रदेश में संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संवर्धन की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने वाले ‘महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान’ को नई दिशा देने की जिम्मेदारी अब कौशल शर्मा के मजबूत हाथों में सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए संस्थान के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है।
नियुक्ति से जुड़ी अहम जानकारी (Quick Facts)
| विवरण | जानकारी |
| नाम | कौशल शर्मा |
| नया पद / दायित्व | अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त) |
| संस्थान | महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान |
| स्थान | डबरा (मध्य प्रदेश) |
| मुख्य लक्ष्य | संस्कृत का प्रचार-प्रसार एवं युवाओं की भागीदारी बढ़ाना |
भव्य समारोह में किया पदभार ग्रहण
कौशल शर्मा के पदभार ग्रहण समारोह का आयोजन डबरा में बेहद हर्षोल्लास के साथ किया गया।
-
इस खास अवसर पर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और संस्कृत भाषा के विद्वान उपस्थित रहे।
-
कार्यक्रम में शामिल हुए सभी अतिथियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
-
उपस्थित लोगों ने आशा व्यक्त की कि उनके सक्षम नेतृत्व में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
अध्यक्ष कौशल शर्मा का विजन: युवाओं को संस्कृत से जोड़ना
महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष के रूप में अपना पदभार ग्रहण करते ही कौशल शर्मा ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया।
-
संस्कृत का प्रचार-प्रसार: उन्होंने कहा कि उनका मुख्य जोर समाज में संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार पर रहेगा।
-
युवाओं की भागीदारी: उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी प्राचीन भाषा और संस्कृति से जोड़ना बेहद जरूरी है, और वे इस दिशा में निरंतर प्रयास करेंगे।
जनप्रतिनिधियों ने जताया भरोसा
समारोह में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अध्यक्ष का यह दायित्व केवल एक सम्मान का विषय नहीं है, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। सभी ने उनके सफल और ऊर्जावान कार्यकाल की कामना करते हुए यह विश्वास जताया कि कौशल शर्मा के नेतृत्व में संस्थान नई उपलब्धियां और कीर्तिमान स्थापित करेगा।