परिसीमन और महिला आरक्षण पर अपनी बातों पर कायम
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः 4 मई को विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण, लोकसभा सीटों के विस्तार और परिसीमन अभ्यास से जुड़ी भावी रणनीति पर चर्चा करना होगा। हालांकि विपक्ष लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को गिराने में सफल रहा है, लेकिन उनका मानना है कि सरकार इस विधेयक को किसी अन्य रूप में दोबारा पेश कर सकती है। इसी को देखते हुए, मई के मध्य तक गठबंधन के नेता परिसीमन के जटिल मुद्दे से निपटने के लिए एकजुट हो सकते हैं।
सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाए और इनमें से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। यद्यपि सरकार ने आश्वासन दिया था कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी ताकि प्रतिनिधित्व का मौजूदा अनुपात न बिगड़े, लेकिन इस प्रावधान को मूल विधेयक का हिस्सा नहीं बनाया गया था, जिसे लेकर विपक्ष आशंकित है।
एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने कहा, सरकार को उम्मीद थी कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के सदस्य मतदान के दौरान मौजूद नहीं रहेंगे और उत्तर प्रदेश के विपक्षी सदस्य इसका विरोध करेंगे या अनुपस्थित रहेंगे। ऐसा नहीं हुआ और हमने संख्या बल जुटा लिया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतनी आसानी से अपनी योजना नहीं छोड़ेंगे। कांग्रेस पार्टी ने अपनी मांग दोहराई है कि सरकार को अपनी परिसीमन योजनाओं पर चर्चा करनी चाहिए। साथ ही, कांग्रेस वर्तमान लोकसभा सीटों की संख्या पर ही महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के लिए दबाव बना रही है।
गठबंधन के नेताओं का कहना है कि इस बैठक में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों पर चर्चा होने की संभावना कम है, क्योंकि केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गठबंधन के घटक दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा है।
बैठक में चुनाव आयोग की भूमिका, विशेषकर पश्चिम बंगाल में, चर्चा का मुख्य केंद्र होगी। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने के लिए दूसरा नोटिस दिया है। यह बैठक विपक्षी एकता और सरकार के विधायी एजेंडे के खिलाफ एक साझा मोर्चा तैयार करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।