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डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खातों को बंद किया है

गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत किये

  • कुल 94 सौ खातों की पहचान की गयी है

  • कंबोडिया से संचालित हो रहा ऐसा स्कैम

  • सेवा प्रदाताओँ को भी सतर्क किया गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के अनुसार, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने गृह मंत्रालय को सूचित किया है कि एक गहन और स्वतंत्र जांच के बाद उसने डिजिटल अरेस्ट और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े लगभग 9,400 खातों को प्रतिबंधित कर दिया है। यह कार्रवाई प्लेटफॉर्म द्वारा चलाए गए एक व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत खातों को बंद करना नहीं, बल्कि इन घोटालों के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

व्हाट्सएप ने स्पष्ट किया कि उसने केवल उन शुरुआती इनपुट पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, जो जांच एजेंसियों या केंद्र सरकार द्वारा रिपोर्ट किए गए थे, पूरे आपराधिक तंत्र को मानचित्रित करने का प्रयास किया। प्लेटफॉर्म के अनुसार, ये जालसाज मुख्य रूप से कंबोडिया जैसे देशों से सक्रिय हैं। सरकारी स्रोतों से प्राप्त शुरुआती संकेतों को आधार बनाकर प्लेटफॉर्म ने उन मुख्य संचालकों और प्रशासकों की पहचान की, जो डिजिटल अरेस्ट जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले समूहों और चैनलों का प्रबंधन कर रहे थे।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से गृह मंत्रालय द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर स्थिति रिपोर्ट में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने व्हाट्सएप और मंत्रालय के बीच हुए इस संवाद का विवरण दिया। रिपोर्ट में मार्च में आयोजित एक अंतर-विभागीय समिति की बैठक का भी उल्लेख है, जिसमें एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल जैसे प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ व्हाट्सएप ने भी भाग लिया था।

व्हाट्सएप ने आश्वासन दिया है कि वह सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का पूरी तरह पालन करेगा। इसमें सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन की पहचान और लेबलिंग शामिल है, जिसका उपयोग अक्सर वीडियो कॉल के दौरान डिजिटल अरेस्ट को असली दिखाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, सिम बाइंडिंग (खाते को भौतिक सिम कार्ड से जोड़ना) की प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है।

प्लेटफॉर्म ने धोखाधड़ी को रोकने के लिए निम्नलिखित तकनीकी और सुरक्षात्मक कदम उठाने पर सहमति जताई है। डिजिटल अरेस्ट घोटालों में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस आईडी की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों को मजबूत करना ताकि आधिकारिक लोगो के दुरुपयोग और फर्जी सामग्री को पकड़ा जा सके।

जांच एजेंसियों की सहायता के लिए हटाए गए खातों के डेटा को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखना। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने डिजिटल अरेस्ट को साइबर अपराधों में सबसे परेशान करने वाला और घातक करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल वित्तीय नुकसान नहीं है, बल्कि मानवीय गरिमा के विरुद्ध अपराध है, क्योंकि इसमें पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूर किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने अब तक डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी 2.41 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की हैं, जिनमें लगभग 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।