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दीमक खुद ही मौत के जाल में फंसते हैं

यूसी रिवरसाइड के शोधकर्ताओं ने बिल्कुल नई तकनीक बनायी

  • पाइनिन नामक यौगिक का उपयोग किया

  • गैस का इस्तेमाल इंसानों के लिए खतरा

  • खुशबू से दीमक खुद ही चले आते हैं

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राष्ट्रीय खबर

रांचीः यूसी रिवरसाइड के वैज्ञानिकों ने पश्चिमी ड्राईवुड दीमकों को खत्म करने का एक सस्ता और बेहद प्रभावी तरीका खोज निकाला है। अब हर छिपने की जगह को खोजने के बजाय, दीमकों को खुद कीटनाशक की ओर आकर्षित कर उन्हें खत्म किया जा सकता है। जर्नल ऑफ इकोनॉमिक एंटोमोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, टीम ने पाइनिन नामक एक खुशबूदार यौगिक का उपयोग किया है। यह पदार्थ जंगलों में पेड़ों से निकलता है और दीमकों को उपचारित लकड़ी की ओर बढ़ने के लिए मजबूर कर देता है।

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इस प्रयोग के परिणाम चौंकाने वाले रहे। केवल कीटनाशक के इस्तेमाल से जहाँ मृत्यु दर 70 प्रतिशत थी, वहीं पाइनिन मिलाने पर यह बढ़कर 95 फीसद से अधिक हो गई। यूसीआर के कीटविज्ञानी डोंग-ह्वान चोए, जिन्होंने इस खोज का नेतृत्व किया, कहते हैं, पाइनिन के बिना हमने लगभग 70 प्रतिशत मृत्यु दर देखी, लेकिन इसके जुड़ते ही यह 95 प्रतिशत के पार पहुंच गई।

पश्चिमी ड्राईवुड दीमक उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी हैं और प्रकृति में मृत लकड़ी को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब ये जंगलों से घरों की ओर रुख करते हैं, तो समस्या शुरू होती है। ये दीमक प्राकृतिक लकड़ी और घरों में इस्तेमाल होने वाली इमारती लकड़ी के बीच फर्क नहीं कर पाते। कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, कनाडा और मैक्सिको जैसे गर्म इलाकों में यह एक बड़ी चिंता का विषय है। चोए के अनुसार, यह सिर्फ समय की बात है कि दीमक कब घर पर हमला करेंगे।

दीमकों के उपचार के लिए वर्तमान में फ्यूमिगेशन (पूरे घर को टेंट से ढंककर जहरीली गैस भरना) का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। लेकिन इसके कई नुकसान हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाली गैस सल्फ्यूरिल फ्लोराइड मनुष्यों के लिए जहरीली है और एक ग्रीनहाउस गैस भी है। साथ ही, यह काफी खर्चीला है और भविष्य में दोबारा दीमक लगने से नहीं रोकता।

एक अन्य विकल्प लोकलाइज्ड इंजेक्शन है, जिसमें संक्रमित लकड़ी में छेद करके सीधे कीटनाशक डाला जाता है। यह फ्यूमिगेशन से सस्ता है और इसमें कम रसायनों की जरूरत होती है। सबसे बड़ी चुनौती लकड़ी के भीतर दीमकों के सटीक ठिकाने को खोजने की होती है। यहीं पाइनिन काम आता है। इसकी गंध दीमकों को भोजन का अहसास कराती है और वे दूर से ही कीटनाशक की ओर खिंचे चले आते हैं। वैज्ञानिकों ने इस शोध में फिप्रोनिल कीटनाशक का उपयोग किया। पाइनिन के कारण अब पूरे सुरंग तंत्र में कीटनाशक भरने की जरूरत नहीं पड़ती। चोए का मानना है कि कीटों के व्यवहार को समझकर हम कम रसायनों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से कीट प्रबंधन कर सकते हैं।