महिला आरक्षण भाषण में नरेंद्र मोदी पर और दबाव बढ़ा
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः नागरिक समाज के 700 से अधिक कार्यकर्ताओं, पूर्व नौकरशाहों और शिक्षाविदों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को महिला आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्र के नाम दिए गए अपने संबोधन में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को 20 अप्रैल को लिखे गए पत्र में इन कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के दो दिन पुराने संबोधन की जांच की मांग की। पत्र में दावा किया गया है कि यह संबोधन आचार संहिता का स्पष्ट और घोर उल्लंघन है। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा सरकारी मशीनरी और जनसंचार माध्यमों का उपयोग चुनावी प्रचार और दलीय प्रोपेगेंडा के लिए करना एक गंभीर उल्लंघन है। उनका कहना है कि इस तरह के कार्यों से सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ मिलता है और यह स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करता है।
पत्र में कहा गया है कि यदि यह संबोधन चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना किया गया था, तो यह आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। कार्यकर्ताओं ने चुनाव निकाय से मांग की है कि इस भाषण को सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, सरकारी वेबसाइटों और मीडिया प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। आचार संहिता के उल्लंघन के लिए उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाए। यदि संबोधन के लिए आयोग ने अनुमति दी थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय मीडिया पर समान समय प्रदान किया जाए।
इस शिकायत पर हस्ताक्षर करने वाले 714 लोगों में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, पूर्व नौकरशाह नजीब जंग और एम.जी. देवसहायम, शिक्षाविद जोया हसन और जी.एन. देवी, संगीतकार टी.एम. कृष्णा, और कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज व योगेंद्र यादव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि वह चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए इस मामले की तुरंत जांच शुरू करे और जांच के बाद की गई कार्रवाई से शिकायतकर्ताओं को जल्द से जल्द अवगत कराए।