पोप के साथ बयान युद्ध में उलझने के बाद नया कारनामा
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अपनी आलोचना से भड़क रहे हैं
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पहले खुद को शांति दूत बताया
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पोप भी पीछे हटने को तैयार नहीं
एजेंसियां
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर धार्मिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित एक अत्यंत विवादास्पद तस्वीर साझा की है, जिसमें उन्हें ईसा मसीह के रूप में चित्रित किया गया है। इस एआई इमेज में ट्रंप को मसीहाई मुद्रा में दिखाया गया है, जिनके चारों ओर अलौकिक आभा और ईसाई कला के पारंपरिक प्रतीकों का समावेश है। यह घटना महज़ एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप और वैटिकन के प्रमुख पोप लियो के बीच बढ़ते कड़वे विवाद का नया अध्याय है।
ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि वह पोप लियो के प्रशंसक नहीं हैं। इसके प्रत्युत्तर में, इतिहास के पहले अमेरिकी मूल के पोंटिफ (धर्मगुरु) पोप लियो ने भी तीखा पलटवार किया है। दोनों नेताओं के बीच इस टकराव की मुख्य जड़ ईरान युद्ध को लेकर उनके विपरीत दृष्टिकोण हैं। सोमवार से अफ्रीका की 11 दिवसीय यात्रा पर रवाना होने वाले पोप लियो ने आध्यात्मिक लहजे में चेतावनी दी थी कि ईश्वर उन लोगों की प्रार्थना को अस्वीकार कर देता है जो युद्ध की ज्वाला भड़काते हैं। उन्होंने बाइबिल के उद्धरणों के जरिए ट्रंप की उस युद्धक बयानबाजी की निंदा की, जिसमें राष्ट्रपति ने ईरानी बुनियादी ढांचे और बिजली संयंत्रों पर विनाशकारी हमलों की धमकी दी थी।
रविवार की रात साझा की गई अपनी पोस्ट में ट्रंप ने न केवल ईरान युद्ध का बचाव किया, बल्कि पोप पर तीखे व्यक्तिगत प्रहार भी किए। वेनेजुएला संकट का जिक्र करते हुए ट्रंप ने लिखा, मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए हमलों को भयानक करार दे, जबकि वह देश अमेरिका में भारी मात्रा में ड्रग्स की तस्करी कर रहा था।
2024 के चुनाव में अपनी ऐतिहासिक जीत का हवाला देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि वे केवल अपने जनादेश का पालन कर रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि लियो का चयन केवल ट्रंप को नियंत्रित करने के लिए किया गया था, और यदि वे व्हाइट हाउस में नहीं होते, तो लियो कभी वैटिकन की गद्दी तक नहीं पहुँचते।
ट्रंप ने पोप को अति उदारवादी और कट्टरपंथी वामपंथियों का एजेंट बताते हुए सलाह दी कि वे राजनीति छोड़कर धर्म पर ध्यान दें। जहाँ एक ओर ईसाई संगठनों ने इस चित्रण को अपमानजनक और आस्था का अनादर बताया है, वहीं ट्रंप समर्थकों ने इसे डिजिटल व्यंग्य कहकर बचाव किया है। गौरतलब है कि 2024 में ट्रंप को 55 प्रतिशत कैथोलिक वोट मिले थे, और उनके रक्षा सचिव पीटे हेगसेथ जैसे नेता सार्वजनिक रूप से ईरान पर जीत के लिए ईसा मसीह के नाम पर प्रार्थना करने का आह्वान कर चुके हैं। यह विवाद अब धार्मिक पवित्रता बनाम राजनीतिक राष्ट्रवाद के एक जटिल युद्ध में तब्दील हो चुका है।