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बारामती से सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत लगभग तय

प्रारंभिक खींचतान के बाद अंततः कांग्रेस ने भी दावेदारी छोड़ दी

  • कांग्रेस ने कहा यह शिष्टाचार है

  • अंतिम समय में किया प्रेस कांफ्रेंस

  • खडगे से मिली थी वह खुद भी

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े और अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत, राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार अब बारामती विधानसभा उपचुनाव में निर्विरोध जीत हासिल करने की राह पर हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस चुनावी मुकाबले से हटने का औपचारिक निर्णय लिया है। यह फैसला नामांकन वापस लेने की आज की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) से ठीक पहले सार्वजनिक किया गया, जिससे बारामती के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

मुंबई में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आधिकारिक घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी सुनेत्रा पवार के खिलाफ अपने प्रत्याशी को वापस ले रही है। इस निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए सपकाल ने कहा कि अजीत पवार के आकस्मिक निधन के बाद पैदा हुई परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए पार्टी ने सहानुभूति के आधार पर यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर एक शोक संतप्त परिवार के प्रति सम्मान प्रकट करने का तरीका है।

इस महत्वपूर्ण घोषणा से पहले राजनीतिक हलकों में काफी हलचल देखी गई। सुनेत्रा पवार ने आज नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। इसके साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला और राज्य के अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ भी विस्तृत चर्चा की। इन मुलाकातों ने ही इस निर्विरोध चयन की जमीन तैयार की।

भले ही कांग्रेस ने सुनेत्रा पवार को वॉकओवर दे दिया हो, लेकिन हर्षवर्धन सपकाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैचारिक मोर्चे पर कोई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ कांग्रेस का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। साथ ही, उन्होंने अजीत पवार की पार्टी (एनसीपी) की भाजपा के साथ गठबंधन करने की पुरानी नीति की आलोचना भी की।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी ने पहले सुनेत्रा पवार को कड़ी चुनौती देने के उद्देश्य से आकाश मोरे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। लेकिन शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप और बदले हुए घटनाक्रम के बाद अब मोरे का नाम वापस ले लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही बारामती में होने वाला मुकाबला अब औपचारिक रह गया है और सुनेत्रा पवार का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।