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अत्यधिक ताप सहने वाला नया चिप तैयार

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का काम काज अब और तेज होगा

  • गर्मी की दीवार को पार करती तकनीक

  • तेल और पानी जैसा अनोखा मेल

  • टंगस्टन और ग्राफीन का मेल

राष्ट्रीय खबर

रांचीः यह खबर किसी विज्ञान-कथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी चिप विकसित की है जो 700 डिग्री सें (करीब 1300 डिग्री फारेनहाइट) के खौफनाक तापमान पर भी न केवल सुरक्षित रहती है, बल्कि पूरी फुर्ती से काम भी करती है।

यह तापमान दहकते हुए लावा से भी अधिक है। आज के स्मार्टफोन हों या सैटेलाइट, 200 डिग्री से ऊपर जाते ही इनके इलेक्ट्रॉनिक्स दम तोड़ने लगते हैं। दशकों से इंजीनियरों के लिए गर्मी एक ऐसी दीवार रही है जिसे पार करना असंभव माना जाता था। लेकिन प्रोफेसर जोशुआ यांग और उनकी टीम ने साइंस पत्रिका में प्रकाशित अपने शोध में एक नए प्रकार के मेमरिस्टर का खुलासा किया है। यह एक नैनो-स्केल डिवाइस है जो डेटा स्टोर करने के साथ-साथ गणना भी कर सकता है।

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इस सफलता के पीछे एक इत्तेफाक और बेहतरीन इंजीनियरिंग है। शोधकर्ता मूल रूप से कुछ और बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने पाया कि टंगस्टन और ग्राफीन का मेल कमाल कर रहा है। साधारण चिप्स में अत्यधिक गर्मी के कारण धातु के परमाणु आपस में मिलकर शॉर्ट-सर्किट कर देते हैं।

लेकिन इस नई चिप में ग्राफीन की परत टंगस्टन के साथ तेल और पानी की तरह व्यवहार करती है। टंगस्टन के परमाणु ग्राफीन की सतह पर चिपक नहीं पाते, जिससे शॉर्ट-सर्किट का खतरा खत्म हो जाता है। परीक्षण के दौरान इसने 700 डिग्री सेंटीग्रेड पर 50 घंटों तक डेटा सुरक्षित रखा और एक अरब से ज्यादा बार बिना रुके काम किया।

यह चिप केवल गर्मी सहने के लिए नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है। चैटजीपीटी जैसे ए आई मॉडल मैट्रिक्स मल्टीप्लिकेशन पर आधारित होते हैं, जिसमें पारंपरिक कंप्यूटर बहुत ऊर्जा खर्च करते हैं। यह नया मेमरिस्टर भौतिकी के सरल नियमों का उपयोग करके बिजली के प्रवाह के साथ ही गणना कर लेता है। प्रोफेसर यांग के अनुसार, यह तरीका मौजूदा चिप्स की तुलना में कहीं अधिक तेज और ऊर्जा-कुशल है।

इस चिप के आने से शुक्र जैसे गर्म ग्रहों पर शोध करना संभव हो जाएगा, जहाँ अब तक के सभी लैंडर गर्मी के कारण नष्ट हो जाते थे। इसके अलावा, यह तकनीक परमाणु रिएक्टरों, भू-तापीय ऊर्जा संयंत्रों और भविष्य की कारों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि इसे बाजार तक पहुंचने में अभी समय लगेगा, लेकिन प्रोफेसर यांग कहते हैं, हमने वह हिस्सा बना लिया है जो अब तक गायब था।

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