विपक्ष ने लगाया चुनावी राजनीति का आरोप
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सिर्फ चुनाव के वक्त मुद्दा उछाला
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बार बार बयान क्यों बदल रही सरकार
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तीस माह बाद यू टर्न क्यों ले रहे हैं
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में संशोधन के सरकारी प्रस्ताव पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने 16 अप्रैल से शुरू होने वाली आगामी बैठकों में इस संशोधन को लाने के सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार यह कदम केवल आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए उठा रही है।
प्रश्नकाल के बाद सदन में इस मुद्दे पर गरमागरम बहस शुरू हुई। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब 23 सितंबर, 2023 को यह अधिनियम पारित किया गया था, तब विपक्ष ने इसे 2024 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करने की मांग की थी।
जयराम रमेश ने सदन में कहा, उस समय सरकार ने तर्क दिया था कि जनगणना और परिसीमन के बिना इसे लागू करना संभव नहीं है। लेकिन अब, करीब 30 महीनों तक शांत रहने के बाद, अचानक सरकार को लगता है कि जनगणना और परिसीमन की आवश्यकता नहीं है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उन्हें पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के चुनावों में चुनौती दिख रही है। यह पूरी तरह से राजनीति है।
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया कि कानून कब और किस समय लाना है, यह तय करना सरकार का अधिकार है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जोर देकर कहा कि सरकार देश की महिलाओं से किए गए अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। रिजिजू ने जवाबी हमला करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय को राज्यों के चुनावों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि समय की सीमाओं को देखते हुए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना अनिवार्य है और इस पर राजनीति करना उचित नहीं है।
इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यद्यपि सभी दल महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन सरकार को इस बिल को लाने के समय और तरीके को लेकर खेल नहीं खेलना चाहिए। विपक्षी दलों का मुख्य तर्क यह है कि यदि सरकार अब बिना परिसीमन के आरक्षण लागू करने को तैयार है, तो उसने पिछले दो वर्षों से इसे क्यों रोके रखा था। सदन में हुई इस बहस ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी सत्र में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, विशेषकर जब बंगाल और तमिलनाडु की चुनावी तपिश बढ़ रही है।