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पुणे में बारिश का 130 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

जलवायु परिवर्तन का ऐसा हाल देख हैरान हो रहे नागरिक

  • 1896 के बाद अप्रैल की सबसे भीषण वर्षा

  • कई इलाके में अचानक पानी भरने से परेशानी

  • तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गयी

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे ने मौसम के मिजाज में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा है। गुरुवार को शहर में हुई मूसलाधार बारिश ने पिछले 130 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। आंकड़ों के अनुसार, पुणे में अप्रैल महीने में इतनी अधिक वर्षा साल 1896 के बाद पहली बार दर्ज की गई है। गुरुवार दोपहर को शुरू हुई भारी बारिश ने शहर के विभिन्न हिस्सों को जलमग्न कर दिया। शिवाजीनगर में सर्वाधिक 65 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसने 4 अप्रैल, 1896 के 51.1 मिमी के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। एनडीए क्षेत्र में 84 मिमी (सबसे अधिक),हड़पसर: 42 मिमी, पाषाण: 36.3 मिमी, चिंचवड़: 28.5 मिमी, लोहेगांव: 21 मिमी बारिश रिकार्ड किया गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस अप्रत्याशित वर्षा के पीछे कई वायुमंडलीय प्रणालियाँ सक्रिय थीं। पुणे के वैज्ञानिक एस. डी. सनप ने बताया कि दक्षिण तमिलनाडु से उत्तरी कोंकण तट तक पूर्वी हवाओं में एक कम दबाव की रेखा बनी हुई है। इसके साथ ही, उत्तर-पश्चिम भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण जेट स्ट्रीम दक्षिण की ओर खिसक गई है। इन कारकों के मिलन से गरज के साथ बादल बने और ओलावृष्टि की स्थिति उत्पन्न हुई।

लगातार हुई बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं के कारण पुणे के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है। शिवाजीनगर में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सी  दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.6 डिग्री सी कम है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 अप्रैल से आसमान साफ होने के साथ तापमान फिर से बढ़ना शुरू होगा और 8 अप्रैल तक यह 38 डिग्री सी तक पहुंच सकता है।

मौसम विभाग ने पुणे और उसके आसपास के इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी रखा है। वहीं, मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। विदर्भ में भी 5 अप्रैल तक गरज और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है, जिससे नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।