एक त्वरित सर्वेक्षण ने ट्रंप की सोच की हवा निकाल दी है
न्यूयार्कः संयुक्त राज्य अमेरिका में सार्वजनिक राय अब ईरान युद्ध के खिलाफ तेजी से झुकती नजर आ रही है। रॉयटर्स/इप्सोस के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, दो-तिहाई अमेरिकियों का मानना है कि अमेरिका को ईरान युद्ध में अपनी भागीदारी को जल्दी समाप्त करना चाहिए, भले ही इसका मतलब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त न करना ही क्यों न हो। शुक्रवार से रविवार तक आयोजित इस सर्वेक्षण में 66 फीसद उत्तरदाताओं ने युद्ध की त्वरित समाप्ति का समर्थन किया, जबकि केवल 27 फीसद का मानना था कि अमेरिका को तब तक संघर्ष जारी रखना चाहिए जब तक कि सभी लक्ष्य हासिल न हो जाएं।
राजनीतिक आधार पर भी इस मुद्दे पर स्पष्ट विभाजन देखा गया। जहाँ विपक्षी खेमे में युद्ध विरोध अधिक है, वहीं ट्रम्प की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी 40 फीसद समर्थकों ने लक्ष्यों की प्राप्ति के बिना ही युद्ध को जल्द समाप्त करने की इच्छा जताई है। हालांकि, रिपब्लिकन का एक बड़ा हिस्सा (57 फीसद) अब भी लंबे समय तक युद्ध जारी रखने के पक्ष में है। एक महीने से जारी इस संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे हजारों लोगों की जान गई है और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, जिससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) का डर बढ़ गया है।
युद्ध का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। सर्वेक्षण में शामिल 60 फीसद लोगों ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों को पूरी तरह अनुचित बताया और अपनी असहमति दर्ज की। युद्ध के सबसे दृश्य प्रभावों में से एक गैसोलीन (पेट्रोल) की बढ़ती कीमत है। गैस-बडी के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को गैस की कीमत पिछले तीन वर्षों में पहली बार $4 प्रति गैलन के पार पहुंच गई। उत्तरदाताओं में से 66 फीसद का मानना है कि अगले एक साल में ईंधन की कीमतें और खराब होंगी, जो उनकी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।
यह सर्वेक्षण ऐसे समय में आया है जब नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव तय करेंगे कि रिपब्लिकन पार्टी सदन और सीनेट में अपना बहुमत बरकरार रख पाएगी या नहीं। ऐतिहासिक रूप से सत्ताधारी पार्टी मध्यावधि चुनावों में सीटें हारती रही है, और वर्तमान आर्थिक अस्थिरता ट्रम्प प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक लोगों का मानना है कि इस संघर्ष का उनके वित्तीय भविष्य पर ज्यादातर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे मतदाता आने वाले महीनों में शांति और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे सकते हैं।