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ट्रंप अब ईरान छोड़ने को तैयार पर नेतन्याहू अड़े

ईरान युद्ध में दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलग अलग तेवर

  • अपने सहयोगियों को भी चेतावनी दी

  • होर्मुज की जिम्मेदारी दूसरे देश उठायें

  • अमेरिकी कंपनियों पर हमले की धमकी

वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी युद्ध के भविष्य को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच कूटनीतिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन बिना किसी औपचारिक समझौते के भी दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान पर अपने सैन्य हमले समाप्त कर सकता है। इसके ठीक उलट, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा और ईरान के आतंकी शासन को पूरी तरह कुचलने तक पीछे नहीं हटेगा।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत जारी अमेरिकी हमले जल्द ही समाप्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा, हम बहुत जल्द वहां से निकल रहे हैं… शायद दो हफ्ते, शायद तीन।

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ कोई कूटनीतिक समझौता होना इस वापसी की पूर्व शर्त है, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा, ईरान को मेरे साथ कोई समझौता करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि हमने उन्हें पाषाण युग में पहुंचा दिया है और वे वर्षों तक परमाणु हथियार नहीं बना पाएंगे, तब हम वहां से हट जाएंगे।

ट्रंप ने उन सहयोगियों पर भी निशाना साधा जो इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों से कहा कि वे अपना तेल खुद हासिल करें और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन देशों को लेनी चाहिए जो उस पर निर्भर हैं।

ट्रंप के नरम रुख के विपरीत, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि इजरायल का अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक रणनीतिक उद्देश्य हासिल नहीं हो जाते। उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने शक्ति संतुलन में रणनीतिक उलटफेर किया है। नेतन्याहू ने कहा, ईरान हमें दबाना चाहता था, लेकिन अब इजरायल ईरान और उसके गुर्गों की घेराबंदी कर रहा है। इजरायली सेना ने बुधवार (1 अप्रैल, 2026) को तेहरान और बेरूत में बुनियादी ढांचों पर हमलों की एक नई लहर की पुष्टि की है, जिससे स्पष्ट है कि वे युद्ध विराम के मूड में नहीं हैं।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि उनका देश युद्ध समाप्त करने की इच्छा रखता है, लेकिन इसके लिए उन्हें इस बात की गारंटी चाहिए कि भविष्य में उन पर दोबारा हमले नहीं होंगे। इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने धमकी दी है कि यदि उनके नेताओं की हत्याएं जारी रहीं, तो वे 1 अप्रैल की रात से गूगल, एप्पल और टेस्ला जैसी बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाएंगे।